बिजली की डिमांड में ठंड बढ़ने का दिखने लगा असर
कोरबा। गुलाबी ठंड ने दस्तक दे दी है। रात और सुबह के समय ठंड अधिक लग रही है। इसी के साथ गर्मी से निजात पाने एसी, कूलर, पंखे चलने कम हो गए हैं। खेतों में लगी फसल की कटाई भी शुरू हो गई है। जिससे सिंचाई की जरूरत पर विराम लग चुका है। इसका असर बिजली की डिमांड पर पड़ा है। पहले जहां मांग 5500 मेगावाट के थी जो अब 4000 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। प्रदेश में बिजली की डिमांड में कमी आई है। अक्टूबर माह में बिजली की डिमांड गर्मियों की तरह बनी हुई थी। बिजली की डिमांड पूरा करने सेंट्रल सेक्टर से अधिक बिजली लेनी पड़ रही थी। पिछले एक सप्ताह के भीतर तापमान का पारा लगातार गिर रहा है। जिससे बिजली की डिमांड भी कम होती जा रही है। पिक लोड अवर में बिजली की डिमांड 4000 मेगावाट बनी रही। सेंट्रल सेक्टर से लगभग 1500 मेगावाट बिजली ली जा रही है। इससे पूर्व जब डिमांड 5500मेगावाट तक पहुंच रही थी तब सेंट्रल सेक्टर से 3000 मेगावाट तक बिजली ली जा रही थी। वर्तमान में लगभग 1500 मेगावाट डिमांड में कमी से सेंट्रल सेक्टर से बिजली लेना भी आधा हो गया है। राज्य उत्पादन कंपनी के संयंत्रों से पर्याप्त बिजली मिलने से राहत बनी हुई है। आगामी दिनों में ठंड और बढ़ने पर डिमांड 3000 से 3500 मेगावाट तक गिर सकती है।
एक तरफ जहां बिजली की डिमांड में कमी आ गई है वहीं दूसरी ओर राज्य उत्पादन कंपनी के संयंत्रों की कोरबा पश्चिम की एक छोड़कर सभी इकाई उत्पादन में है। पूर्व में डीएसपीएम व एचटीपीपी की इकाइयों में रखरखाव का काम चल रहा था। वर्तमान में एचटीपीपी की चारों चालू इकाई से उत्पादन हो रहा है।डीएसपीएम की दोनों इकाई से 500 मेगावाट के मुकाबले 392 व मड़वा की दोनों इकाई से 1000 मेगावाट के मुकाबले 700 से 900 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा था।
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