Saturday, February 21, 2026

दो कंपनियों ने सूरज की ऊर्जा से बिजली उत्पादन करने किया करार, साल दर साल बिजली की बढ़ रही डिमांड को लेकर लिया गया निर्णय

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दो कंपनियों ने सूरज की ऊर्जा से बिजली उत्पादन करने किया करार, साल दर साल बिजली की बढ़ रही डिमांड को लेकर लिया गया निर्णय

कोरबा। ताप आधारित संयंत्रों में कोयले से बिजली बनाने वाली दो कंपनियों ने सूरज की ऊर्जा से भी अब बिजली उत्पादन करने करार किया है। 2 हजार मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना को विकसित करने छत्तीसगढ़ की बिजली उत्पादन कंपनी व देश की सबसे बड़ी एकीकृत बिजली परियोजना एनटीपीसी की सहायक कंपनी मेसर्स एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड ने एमओयू पर हस्ताक्षर किया है। ये दोनों कंपनियां मिलकर एक संयुक्त उपक्रम कंपनी बनाएंगी।इसी उपक्रम कंपनी राज्य में लगभग 2 हजार मेगावाट क्षमता की सौर परियोजना के विकास में काम करेगी। इसे छत्तीसगढ़ में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में नए युग की शुरूआत के रूप में देखा जा रहा है। छत्तीसगढ़ की उत्पादन कंपनी व एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर के बाद राज्य बिजली कंपनी के अध्यक्ष डॉ. रोहित यादव ने नवीकरण ऊर्जा के क्षेत्र में नए इतिहास रचने की बात कही है। मेसर्स एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एनजीईएल) एनटीपीसी कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। एनटीपीसी के रीजनल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पीके मिश्रा व उत्पादन कंपनी के प्रबंध निदेशक एसके कटियार की मौजूदगी में एमओयू हुआ है, जिसमें एनजीईएल की ओर से महाप्रबंधक (अभियांत्रिकी) धीरेंद्र जोशी और उत्पादन कंपनी की ओर से मुख्य अभियंता (कार्पोरेट प्लानिंग एंड बिजनेस डेवलेपमेंट) गिरीश गुप्ता ने हस्ताक्षर किया है। इस ज्वाइंट वेंचर कंपनी 2 हजार मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजना विकसित करने पर काम करेगी। ग्रीन एनर्जी से ऊर्जा पैदा करने का यह प्रोजेक्ट केन्द्र सरकार की मंशा के अनुरूप होगा। साथ ही राज्य के नवीकरणीय ऊर्जा के दायित्वों के पालन में सहायक साबित होगी।
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पानी की ऊर्जा का इस्तेमाल कर बिजली बनाने की प्रोजेक्ट प्रक्रिया में
राज्य उत्पादन कंपनी के पानी की ऊर्जा का इस्तेमाल कर बिजली बनाने का प्रोजेक्ट भी प्रक्रिया में है। इससे भविष्य में पंप स्टोरेज तकनीक का प्लांट भी छत्तीसगढ़ की बिजली आपूर्ति को पूरा करने में सहायक बनेगी। क्योंकि हसदेव बांगो बांध व सिकासेर जलाशय में 1200 मेगावाट, डांगरी जशपुर में 1400 मेगावाट, कीटपल्ली बलरामपुर में 1800 मेगावाट व रौनी में 2100 मेगावाट क्षमता का पंप स्टोरेज पर आधारित संयंत्र लगेंगे।
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रोजगार के खुलेंगे द्वार
राज्य में हर साल बिजली की बढ़ रही मांग को देखते हुए अब ताप आधारित बिजली संयंत्रों के अलावा वैकल्पिक स्त्रोत का सहारा लेना पड़ा है। जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना को छत्तीसगढ़ सरकार आगे बढ़ाएगी। इससे रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। साथ ही राज्य की भावी बिजली जरूरतें पूरा होने के साथ ही राज्य के समग्र विकास और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

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