कुसमुंडा में 108 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का शुभारंभ, देव संस्कृति में यज्ञ का विशेष महत्व-परमेश्वर

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कुसमुंडा में 108 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का शुभारंभ, देव संस्कृति में यज्ञ का विशेष महत्व-परमेश्वर

कोरबा। देव संस्कृति में यज्ञ का विशेष महत्व है। उच्च आदर्शों को जीवन में अपनाने के लिए किए गए संकल्पबद्ध प्रयासों को यज्ञ कहा जाता है। यज्ञ के तीन पक्ष होते हैं। अग्निहोत्र, मंत्र प्रयोग व साधकों-याजकों की श्रद्धा-भावना। इन तीनों के संयोग से ही यज्ञ बनता है। यह बात गुरुवार को कुसमुंडा में आयोजित 108 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ में यज्ञ का विधिवत देव पूजन कराते हुए शांतिकुंज हरिद्वार से आए टोली नायक परमेश्वर साहू ने कही। यज्ञ के लिए विशिष्ट टोली में टोली नायक के साथ सह टोली नायक त्रिलोचन साहू, युग गायक संजय कुमार, वादक अभय कुमार एवं शंकर लाल यज्ञ संचालन के लिए मंचस्थ थे। राजेश श्रीवास्तव व उनकी पत्नी अल्का श्रीवास्तव के मुख्य आतिथ्य में 108 कुण्डीय यज्ञ शाला में श्रद्धालुओं ने आहुतियां डाली। यज्ञ स्थल पर आरएन सिंह बिसेन, योगेश चन्द्रा, मुकेश अदलखा, दीपक कश्यप के सहयोग से जीवनोपयोगी युग साहित्य का पुस्तक मेला संचालित हो रहा है। जहां सस्ते दामों पर साहित्य उपलब्ध है। इसे ज्ञान यज्ञ का प्रसाद मानते हुए श्रद्धालुगण घर ले जा रहे हैं।

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