चैतुरगढ़ पहाड़ी के आसपास बाघ की मौजूदगी की अधिकृत पुष्टि नहीं, वाइल्ड लाइफ को भेजे गए पैरों के निशान, रिपोर्ट का इंतजार

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चैतुरगढ़ पहाड़ी के आसपास बाघ की मौजूदगी की अधिकृत पुष्टि नहीं, वाइल्ड लाइफ को भेजे गए पैरों के निशान, रिपोर्ट का इंतजार

कोरबा। वनमंडल कटघोरा अंतर्गत चैतुरगढ़ पहाड़ी के आसपास बाघ की मौजूदगी की अधिकृत पुष्टि अभी तक वन विभाग की ओर से नहीं की गई है। विभाग की ओर से बताया गया है कि बाघ का पता लगाने के लिए इस क्षेत्र में दर्जन भर सीसीटीवी कैमरे अलग-अलग स्थानों पर लगाए गए हैं लेकिन अभी तक किसी भी कैमरे में बाघ की तस्वीर कैद नहीं हुई है। वाइल्ड लाइफ को भेजी गई रिपोर्ट भी नहीं आई है। विभाग का कहना है कि जब तक सीसीटीवी कैमरे या वाइल्ड लाइफ को भेजे गए पैरों के निशान से बाघ की पुष्टि नहीं हो जाती तब तक बाघ की मौजूदगी को स्वीकार करना सही नहीं होगा। शनिवार रात से रविवार की शाम तक अलग-अलग स्थानों पर लगाए गए सीसीटीवी फुटेज में बाघ की तस्वीर कैद नहीं हुई है। लोगों ने विभाग को यह जरूर बताया है कि उन्होंने इस क्षेत्र में बाघ को देखा है। एक दिन पहले इस जानवर के हमले में एक भैंस की मौत हो गई थी। लोगों ने भैंस की मौत का कारण बाघ का हमला बताया था। तब वन विभाग की टीम को चैतुरगढ़ की जंगल भेजा गया था। टीम ने मृत भैंस के आसपास पाए गए जानवर के पदचिन्ह को मापा था और इसे वाइल्ड लाइफ को भेज दिया था। वन विभाग को आशंका है कि यह जानवर बाघ या तेंदुआ हो सकता है। लेकिन अभी तक वाइल्ड लाइफ की ओर से भी पैरों के निशान संबंधी जानकारी कटघोरा वनमंडल के साथ साझा नहीं की गई है। जिससे वन विभाग यह जान सके कि उसके क्षेत्र में मौजूद जानवर बाघ है या तेंदुआ।

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