बांकी मोंगरा में हर्षोल्लास से मनाया गया बाबा जीकी 269 वी जयंती
बांकी मोंगरा में बड़े ही धूम धाम से बाबा गुरुघासीदास जीकी जयंती मनाया गया।बाबा की जयंती के शुभ अवसर पर बांकी मोंगरा के गजरा साईड से ध्वज रैली डी जे साउंड के धुन पर मनमोहन गीतों के धुन पर थिरकते हुए बांकी मोंगरा मेंन रोड पे सनसाइन स्कूल के सामने जैत खम्भ प्रांगण में पहुंच बाबा की पूजा अर्चना कर ध्वज रोहण कर पुनः गजरा साईड सतनामी कल्याण समिति प्रांगण में वापस लौटे।
कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्षा सोनी विकाश झा,भाजपा के युवामोर्चा के कोषाध्यक्ष विकाश झा,भाजपा मंडल अध्यक्ष उदय शर्मा सहित अन्य लोग सामिल हुए।
गुरु घासीदास जयंती एक महत्वपूर्ण दिन है जो 1756 में जन्मे प्रसिद्ध गुरु घासीदास के जन्मदिन की याद में मनाया जाता है। यह छत्तीसगढ़ राज्य में एक क्षेत्रीय अवकाश है । वे सामाजिक समानता के अपने दर्शन के लिए प्रसिद्ध हैं।
गुरू घासीदास जी को छत्तीसगढ़ के महान संत के रूप में जाना जाता है। यह बचपन से ही दिव्य व्यक्तित्व वाले थे। यह सतनामी समाज के प्रवर्तक होने के साथ-साथ एक समाज सुधारक भी थे। सतनामी समुदाय के अनुयायियों के लिए गुरु घासीदास जयंती खास महत्व रखती है। आज भी लाखों लोग उनके बताए रास्ते पर चलते हैं।
गुरू घासीदास जी से जुड़ी खास बातें –
गुरु घासीदास ने छत्तीसगढ़ में सतनामी समुदाय की स्थापना की, जिसमें ‘सतनाम’ का अर्थ है सत्य और समानता।
इन्होंने स्कूली शिक्षा प्राप्त नहीं की, बल्कि स्वयं ही ज्ञान प्राप्त किया।
इन्होंने अपने विचारों का प्रचार करने का काम छत्तीसगढ़ के घने जंगलों से शुरू किया।
गुरु घासीदास के बाद, उनके पुत्र गुरु बालक दास ने उनकी शिक्षाओं को आगे बढ़ाने का काम किया।
दी ये शिक्षाएं
गुरू घासीदास जी के समकालीन समाज में भेदभाव और विषमता आदि जैसी बुराइयां चारों ओर फैली हुई थी। ऐसे में उन्होंने समाज में फैली इन कुरीतियों को पर रोक लगाने के लिए भी लोगों को प्रेरित किया। साथ ही लोगों को सत्य के मार्ग पर चलने की भी शिक्षा दी। उन्होंने अपने समाज में फैली आर्थिक विषमता, शोषण, जातिगत भेदभाव और अस्पृश्यता को समाप्त करके ‘मनखे मनखे एक समान’ (मानव- मानव एक समान) का संदेश दिया।
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