कोरबा। भारतीय कम्यूनिष्ठ पार्टी ( भाकपा) का शताब्दी वर्षगांठ गेवरा क्षेत्र के कार्यालय कामरेड देवराज भवन आजाद चौक दीपका कालोनी में मनाया गया। जिसमें संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कामरेड एलपी अघरिया ने कहा कि 17 अक्टूबर 1920 को ताशकंद में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना हुई थी। 26 दिसंबर 1925 को कानपुर में कम्युनिस्ट पार्टी का गठन हुआ। देश के सभी अलग-अलग कम्युनिस्ट समूहों को एक साथ लाने वाली कम्युनिस्ट पार्टी का वास्तविक गठन कानपुर में हुआ और यही से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की नींव पड़ी। ताशकंद में गठित प्रवासी भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी का भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के लिए एक उल्लेखनीय मील के पत्थर के रूप में अपना ऐतिहासिक महत्व है। सिंगार वेलु द्वारा स्थापित हिंदुस्तान की लेबर किसान पार्टी जैसे अन्य कम्युनिस्ट समूहों को कानपुर में स्थापित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी में विलीन कर दिया गया था। 26 दिसंबर 1925 को कानपुर में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के स्थापना सम्मेलन में पार्टी के उद्देश्यों और लक्ष्यों को स्पष्ट करते हुए सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे सिंगार वेलु ने कहा था कि साम्यवाद का आंदोलन किसानों और मजदूरों का आंदोलन है और पार्टी का तात्कालिक उद्देश्य सभी उचित तरीकों से स्वराज या पूर्ण स्वतंत्रता स्थापित करना है। दीपक उपाध्याय ने कहा कि कम्युनिस्ट पार्टी पहले आम चुनाव में कांग्रेस के बाद लोकसभा में मुख्य विपक्ष पार्टी बनकर उभरी थी और कांग्रेस सरकार पर दबाव डालकर गरीबों के लिए खाद्यान्न योजना को लागू करवाया। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को समर्थन देखकर राजाओं का प्रिविपर्स बन्द कराकर बैंकों का राष्ट्रीयकरण कराकर जनहित का काम किया, भूमि सुधार आन्दोलन चलाकर भूमिहीनों को जमीन दिलाने के साथ ही आवास योजना को भी लागू करवाया। आज भी कम्युनिस्ट पार्टी जनहित के सवालों को लेकर जंग के मैदान में संघर्ष कर रही है। कार्यक्रम को कामरेड कृपाल राम, कामरेड सुनील पटेल, कामरेड गोपाल यादव ने भी संबोधित किया। कामरेड दुधनाथ ने धन्यवाद ज्ञापित किए।
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