कोरबा। हसदेव नदी पर मड़वारानी बैराज बनाने की मंजूरी मिली है। प्रशासकीय और तकनीकी मंजूरी के लिए प्रयास कर रहे हैं। इससे क्षेत्र में सिंचाई क्षमता बढ़ जाएगी। इसकी लागत 250 करोड़ होगी। सोलर सिस्टम से लिफ्ट इरीगेशन के माध्यम से 5 हजार हेक्टेयर में सिंचाई हो सकेगी। इससे क्षेत्र में पानी की समस्या भी नहीं रहेगी।
हसदेव बांगो परियोजना ने मड़वारानी बैराज बनाने का प्रस्ताव भेजा था। इसे राज्य शासन ने बजट में भी शामिल किया है। इसके लिए एशियाई विकास बैंक से फंड ली जाएगी। 10 साल पहले जल संसाधन विभाग ने 19 गांवों में पेयजल की समस्या को देखते हुए एनीकट बनाने का निर्णय लिया था। जिला खनिज न्यास से इसकी मंजूरी भी मिल चुकी थी, लेकिन कांग्रेस शासनकाल में इस योजना को ही निरस्त कर दिया गया। इसके बाद राज्य शासन ने इस योजना को भी बजट में शामिल किया था। बैराज से लिफ्ट इरीगेशन से सिंचाई का प्रावधान किया गया है। सोलर सिस्टम से इसका संचालन होगा। इससे बिजली बिल की समस्या नहीं होगी। इसके साथ ही खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए पाइप लाइन बिछाई जाएगी। जमीन अधिग्रहण करने की जरूरत नहीं होगी। कई योजनाएं जमीन नहीं मिलने के कारण आगे नहीं बढ़ पाती है। इस क्षेत्र में भू-जलस्तर भी काफी कमजोर है। जिसके कारण पीएचई ने समूह जलप्रपात योजना से गांवों तक पानी पहुंचाने का निर्णय लिया है। इस क्षेत्र से बांयी तट नहर भी गुजरी है।
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