Thursday, January 22, 2026

आरओबी बनाने 4 से फाइलों में दबा प्रस्ताव, इमलीडुग्गू रेलवे क्रॉसिंग मार्ग पर यातायात का बढ़ा दबाव

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कोरबा। इमलीडुग्गू रेलवे क्रॉसिंग से चांपा जाने और उधर से आने वाले भारी वाहनों के लिए बायपास सडक़ है। उरगा एंड पर इस क्रॉसिंग के होने के कारण ट्रेनों के साथ ही समपार फाटक पर भारी वाहनों का दबाव हमेशा बना रहता है। पहले यहां अंडरब्रिज, फिर रोड ओवर ब्रिज बनाने को लेकर 4 साल पहले चर्चा शुरू हुई। रेल प्रशासन व राज्य शासन के समन्वय से यहां आरओबी बनाने की सहमति भी बन गई, पर प्रक्रिया अब तक फाइलों से आगे ही नहीं बढ़ पाई है। इसका खामियाजा उक्त बायपास से आने जाने वाले सामान्य लोगों को भुगतना पड़ रहा है। हालात यह बन गई है कि हर दिन इस फाटक के दोनों सैकड़ों की संख्या में भारी वाहनों की कतार लगी रहती है। इसके बीच से गुजरने वाले छोटे वाहन चालकों को हमेशा अनहोनी का डर सताते रहता है। इस बायपास का उपयोग एसईसीएल की मानिकपुर कोयला खदान व सेकेंड एंट्री की कोल साइडिंग से कोयला परिवहन में लगे भारी वाहन करते हैं। रेलवे स्टेशन के सेकेंड एंड्री से यह बायपास गुजरा है। इमलीडुग्गू रेलवे फाटक अक्सर बंद ही रहता है। इसके कारण स्टेशन आने जाने वाले यात्रियों के साथ दिन व रात की शिफ्ट में ड्यूटी करने वाले रेलवे के कर्मचारियों को भी परेशान होना पड़ता है। वाहनों की लंबी कतार के बीच या तेज रफ्तार दौडऩे वाहनों के बीच से किसी तरह आवागमन करने मजबूर होते हैं। आरओबी बनने से न केवल इन्हें राहत मिलेगी, वरन चांपा की ओर जाने वाले भारी वाहनों के चालकों को भी घंटों फाटक पर इंतजार नहीं करना पड़ेगा। जाम की वजह से इमलीडुग्गू बस्तीवासियों को परेशान होना पड़ता है, उनकी भी समस्या कम हो जाएगी। यहां बताना होगा कि आमतौर पर रेलवे अपने हिस्से में आरओबी का निर्माण करता है, जबकि पहुंच मार्ग राज्य सरकार द्वारा बनाए जाते हैं। पहुंच मार्गों के निर्माण में अक्सर भूमि की अनुपलब्धता, अतिक्रमण हटाना और आवश्यक धन के आवंटन जैसे कारक होते हैं। इसके बाद भी दो साल पहले पीडब्ल्यूडी सेतु निगम ने इस परियोजना के लिए बोरिंग का काम शुरू किया था। इसके बाद फाइनल प्रपोजल सेंट्रल रोड फंड (सीआरएफ) लिए भेजा भी जा चुका है, लेकिन उक्त प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी आज तक नहीं मिल पायी है। इसके साथ ही बरबसपुर व सीएसईबी फाटक पर भी ओवरब्रिज बनाने की प्रक्रिया मूर्त रूप नहीं ले पाई है।

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