कोरबा। कोयला उद्योग में श्रम प्रबंधन संवाद की मौजूदा व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन हो सकता है। लंबे समय से वेतन समझौते और श्रमिक हितों पर बातचीत का प्रमुख मंच रही जेबीसीसीआई (जॉइंट बाइपार्टाइट कमेटी फॉर कोल इंडस्ट्री) की जगह अब वार्ताकार परिषद गठित किए जाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इस प्रस्ताव को लेकर नीतिगत स्तर पर मंथन तेज हो गया है, जिससे औद्योगिक संबंधों की दिशा बदलने के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, जेबीसीसीआई की मौजूदा संरचना में निर्णय प्रक्रिया लंबी होने, बैठकों में बार-बार गतिरोध पैदा होने और समय पर समझौते नहीं हो पाने जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं। ऐसे में सरकार और प्रबंधन पक्ष मानता है कि एक नई, सुव्यवस्थित व्यवस्था की और परिणामोन्मुख जरूरत है, जो बदलते औद्योगिक हालात के अनुरूप हो।
क्या होगी वार्ताकार परिषद की भूमिका
प्रस्तावित वार्ताकार परिषद में प्रबंधन, मान्यता प्राप्त श्रमिक संगठनों और विषय विशेषज्ञों को शामिल करने की योजना है। परिषद का उद्देश्य वेतन समझौते, सेवा शर्तें, कार्यस्थल सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और अन्य श्रम मुद्दों पर समयबद्ध और पारदर्शी निर्णय लेना होगा। साथ ही बैठकों का रिकॉर्ड, तय एजेंडा और निष्कर्ष आधारित चर्चा को अनिवार्य बनाने पर भी जोर दिया जाएगा। हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर श्रमिक संगठनों में पूरी तरह सहमति नहीं है। यूनियनों का कहना है कि जेबीसीसीआई वर्षों से स्थापित मंच रहा है, जिसने सामूहिक सौदेबाजी को मजबूती दी है। किसी भी नई व्यवस्था में श्रमिकों के अधिकार, प्रतिनिधित्व और आवाज कमजोर नहीं होनी चाहिए। वहीं प्रबंधन और नीति-निर्माताओं का मानना है कि वार्ताकार परिषद से संवाद अधिक व्यावहारिक होगा और फैसले समय पर लिए जा सकेंगे।
औद्योगिक जगत की नजरें
फैसले पर जेबीसीसीआई की जगह अगर वार्ताकार परिषद का गठन होता है, तो यह कोयला उद्योग ही नहीं, बल्कि अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के लिए भी नए श्रम संवाद मॉडल की मिसाल बन सकता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर औपचारिक बैठक और निर्णय की संभावना है, जिस पर पूरे औद्योगिक जगत की निगाहें टिकी हुई हैं। मालूम हो कि वेतन समझौता 11 की समय अवधि 30 जून 26 को समाप्त हो जाएगी।
![]()







