कोरबा। एसईसीएल की कुसमुंडा एरिया कमजोर कड़ी साबित हो रही है। एरिया ने अब तक अपने प्रदर्शन से निराश किया है। अब तक की स्थिति को देखते हुए एरिया का टारगेट हासिल कर पाना मुश्किल नजर आ रहा है। एसईसीएल की जिले में स्थित मेगा परियोजना कुसमुंडा को वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 50 मिलियन टन कोयला उत्पादन का टारगेट दिया गया है। 24 जनवरी तक की स्थिति में एरिया ने उक्त लक्ष्य के मुकाबले केवल 23.26 मिलियन टन कोयला उत्पादन हासिल किया है। जबकि उक्त अवधि तक एरिया से 37.4 मिलियन टन कोयला उत्पादन पूरा हो जाना था। वित्तीय वर्ष की समाप्ति में अब जनवरी के कुछ दिन और फरवरी, मार्च माह की शेष हैं। इन शेष दिनों में एरिया से भारी भरकम कोयला का उत्पादन करना होगा। टारगेट हासिल करने अभी भी एरिया लगभग 27 मिलियन टन और कोयला उत्पादन की जरूरत है। जिले की मेगा परियोजना के बाद कुसमुंडा एरिया को सर्वाधिक कोयला उत्पादन का टारगेट मिला हुआ है। एसईसीएल दूसरी बड़ी कोल माइंस ने अब तक अपने प्रदर्शन से निराश किया है। एरिया को कोयला उत्पादन बढ़ाने कई चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है। हालांकि एरिया प्रबंधन रोजगार, पुर्नवास व अन्य प्रकरणों के त्वरित निराकरण को लेकर गंभीरता दिखा रहा है।
दीपका व गेवरा की स्थिति बेहतर
कुसमुंडा के मुकाबले जिले की दो अन्य मेगा परियोजना गेवरा और दीपका की स्थिति बेहतर है। दीपका एरिया को सालाना 40 मिलियन टन का टारगेट है। अब तक की स्थिति में एरिया से 30.06 मिलियन टन कोयला उत्पादन हो चुका है। शेष बचे दिनों में और 10 मिलियन टन उत्पादन करना होगा, जो एरिया के लिए कठिन नहीं है। दूसरी ओर सर्वाधिक सालाना टारगेट वाले गेवरा एरिया ने 63 मिलियन टन लक्ष्य के मुकाबले 39.11 मिलियन टन कोयला उत्पादन कर लिया है। अब तक की स्थिति में लगभग 83 फीसदी उत्पादन किया जा चुका है। अब शेष बचे दिनों में लगभग 24 मिलियन टन और कोयला उत्पादन की जरूरत एरिया को है।
मेगा परियोजनाओं का प्रदर्शन
एरिया लक्ष्य उत्पादन
कुसमुंडा 50 23.26
गेवरा 63 39.11
दीपका 40 30.06
(आंकड़े मिलियन टन में )
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