कोरबा। सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाएं शुरू हो चुकी है। सीजी बोर्ड की परीक्षाएं जल्द शुरू होंगी। जिसे लेकर छात्र-छात्राएं पढ़ाई में जुट गए हैं, लेकिन शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में देर रात तक बज रहे लाउडस्पीकर उनकी तैयारी में गंभीर बाधा बन रहे हैं। विद्यार्थियों और अभिभावकों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों, सामाजिक कार्यक्रमों और निजी समारोहों में तेज ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग से पढ़ाई का माहौल प्रभावित हो रहा है। इन दिनों माध्यमिक शिक्षा मंडल छत्तीसगढ़ की बोर्ड परीक्षाएं निकट हैं, वहीं केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के छात्र भी वार्षिक परीक्षाओं की तैयारी में व्यस्त हैं। ऐसे समय में शाम से लेकर रात तक तेज आवाज में बजते डीजे और लाउडस्पीकर छात्रों की एकाग्रता भंग कर रहे हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि कई इलाकों में रात 10 बजे के बाद भी ध्वनि प्रदूषण जारी रहता है। परीक्षा की तैयारी के लिए शांति और एकाग्रता आवश्यक होती है, लेकिन लगातार शोर के कारण पढ़ाई में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है। अभिभावकों ने बताया कि छोटे बच्चे और बोर्ड परीक्षार्थी मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक शोर न केवल पढ़ाई बल्कि स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। नींद पूरी न होने से स्मरण शक्ति और एकाग्रता पर असर पड़ता है, जिससे परीक्षा परिणाम प्रभावित हो सकते हैं। विद्यार्थियों और अभिभावकों ने अपील की है कि परीक्षा अवधि के दौरान ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर सख्ती से नियंत्रण रखा जाए, ताकि छात्र शांत वातावरण में अपनी तैयारी पूरी कर सकें। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या कदम उठाता है।
कोलाहल अधिनियम का नहीं हो रहा पालन
परीक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने कोलाहल अधिनियम लागू किया है। ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण को लेकर प्रशासन द्वारा समय-सीमा निर्धारित की गई है। जिसके तहत रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर के उपयोग पर प्रतिबंध है। बावजूद इसके कई स्थानों पर नियमों का पालन नहीं हो रहा। विद्यार्थियों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन से सख्त निगरानी और कार्रवाई की मांग की है।
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