कोरबा। बालिका गृह में पली-बढ़ी अनाथ बिंदु का विवाह छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी के कर्मचारी अनिल से हुआ। यह विवाह वैदिक रीति-रिवाजों के साथ बाल गृह परिसर में संपन्न हुआ। इस अवसर पर विभिन्न समाज के प्रतिष्ठित लोगों ने नवदंपती को आशीर्वाद दिया। अनिल और बिंदु ने हिंदू रीति-रिवाज से अग्नि के सात फेरे लिए। विवाह से पहले उनकी सगाई और मेहंदी की रस्म भी निभाई गई थी। इसमें शहर के कई गणमान्य जनों ने भाग लिया था। केंद्र में रहने वाली छठवीं कन्या का विवाह है। अनिल ने स्वयं बिंदु का चयन किया और उसे दांपत्य जीवन में प्रवेश दिलाया। अनिल के माता-पिता नहीं हैं और वह अपने रिश्तेदारों के साथ रहते हैं। उन्होंने एक अनाथ कन्या का दामन थामने का फैसला किया। बालिका गृह में कोरबा, चांपा, जांजगीर और सक्ती जिले की बालिकाएं आती हैं। केंद्र में उपेक्षित, शोषण और प्रताड़ित बालिकाएं रहती हैं। जिले में कुल 50 बालिकाएं हैं, जिन्हें यहां आश्रय मिलता है। उन्हें 18 वर्ष की उम्र तक पनाह, शिक्षा और रहने-खाने की व्यवस्था दी जाती है। कई अनाथ बेटियां यहां रहकर पढ़ाई की और आज नौकरियां कर रही हैं। भारती नामक एक पूर्व सदस्य ने बताया कि वह भी यहीं से विवाह कर अच्छे घर गई।
प्लास्टिक मुक्त विवाह का दिया संदेश
विवाह समारोह को प्लास्टिक मुक्त बनाने का विशेष प्रयास किया गया। संचालिका ने बताया कि विवाह में प्लास्टिक से संबंधित कोई सामान प्रयोग नहीं हुआ। यह आयोजन समाज को पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश देता है। यह पहल विवाह समारोहों में पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा देगी।
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