Friday, February 27, 2026

कोयले से आगे बढ़ी कोल इंडिया, लिथियम कोबाल्ट खनन में कंपनी रखेगी कदम, पावर सेक्टर में निवेश व स्वच्छ ऊर्जा प्रोजेक्ट्स पर विशेष फोकस

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कोरबा। देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया अब पारंपरिक कोयला खनन से आगे बढ़ते हुए ऊर्जा और खनिज क्षेत्र में व्यापक विस्तार की तैयारी में है। कंपनी लिथियम और कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के खनन, पावर सेक्टर में निवेश विस्तार तथा स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं पर विशेष फोकस करने जा रही है। इसे बदलती ऊर्जा जरूरतों और भविष्य की कारोबारी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, कंपनी की कार्ययोजना में उच्च राख (हाई ऐश) वाले कोयले के बेहतर उपयोग पर जोर दिया गया है। इसके तहत कोयले को सिंथेसिस गैस, अमोनियम नाइट्रेट और मिथनॉल जैसे वैल्यू ऐडेड उत्पादों में बदलने की दिशा में पहल होगी। इसके लिए कंपनी गेल, भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के साथ साझेदारी में परियोजनाएं शुरू करने की योजना बना रही है। ऊर्जा क्षेत्र में विविधीकरण समय की मांग है। स्वच्छ ऊर्जा, गैसीकरण और नये खनिज क्षेत्रों में निवेश से न केवल कंपनी की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी। कोल इंडिया बिजली उत्पादन क्षेत्र में भी अपनी मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। कोयला खदानों के आसपास नये पावर प्लांट स्थापित करने और मौजूदा संयंत्रों की क्षमता विस्तार की योजना तैयार की जा रही है।

क्यों जरूरी है विविधीकरण
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलाव, स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती मांग और आयातित खनिजों पर निर्भरता कम करने की आवश्यकता को देखते हुए यह कदम रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। लिथियम, कोबाल्ट और तांबा जैसे क्रिटिकल मिनरल्स इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी निर्माण और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बेहद अहम हैं। ऐसे में इन खनिजों की खोज और खनन कंपनी की दीर्घकालिक योजना का अहम हिस्सा बनता जा रहा है।

क्लीन एनर्जी और केमिकल सेक्टर पर भी ध्यान
कंपनी की रणनीति में कोयला गैसीकरण, सौर ऊर्जा उत्पादन और रसायन आधारित परियोजनाओं को बढ़ावा देना शामिल है। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने, आय के स्रोतों में विविधता लाने और आयात निर्भरता घटाने में मदद मिलने की संभावना है। नए प्रोजेक्ट्स और ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

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