नवरात्रि 19 से, प्रतिपदा क्षय का योग, फिर भी पूरे 9 दिन मनेगी नवरात्रि, 27 मार्च को महानवमीं पर होगा समापन

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कोरबा। चैत्र नवरात्रि व नव संवत्सर 19 मार्च से शुरू होगा। वहीं नवरात्रि का समापन 27 मार्च को होगा। इस साल चैत्र नवरात्रि एक खास ज्योतिषीय संयोग में शुरू होंगे। प्रतिपदा तिथि अमावस्या में मिलने के कारण पहली तिथि टूटने का योग बन रहा है, लेकिन इसके बावजूद नवरात्रि पूरे नौ दिनों के ही रहेंगे। प्रतिपदा तिथि 19 को सूर्योदय के बाद प्रारंभ होगी और अगले दिन 20 मार्च को सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी। धर्मशास्त्र के अनुसार जिस दिन प्रतिपदा तिथि होती है, उसी दिन नवरात्रि स्थापना करना श्रेष्ठ माना गया है। माता का आगमन डोली पर और विदाई चरणायुध यानी मुर्गा पर होगा। देवी मंदिरों में तैयारी शुरू हो गई हैं। रंगाई का कार्य शुरू हो गया है। मनोकामना ज्योति की बुकिंग शुरू हो गई है। ज्योतिषाचार्यों ने बताया कि 18 मार्च को सुबह 8:26 बजे से अमावस्या लगेगी, जो 19 को सुबह 6:53 बजे तक रहेगी। जबकि सूर्योदय सुबह 6:36 बजे ही हो जाएगा। ऐसे में प्रतिपदा की बजाय अमावस्या उदयव्यापनी तिथि में रह गई। प्रतिपदा तिथि 19 को सुबह 6:53 से 20 को प्रात: 4:53 बजे तक रहेगी, जो सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी। इस वजह से प्रतिपदा तिथि का क्षय होगा। 26 को अष्टमी तिथि सुबह 11:49 तक रहेगी और नवमी प्रारंभ हो जाएगी। जो नवमी 27 को 10:07 बजे तक रहेगी। इसलिए 26 को ही रामनवमी मनाई जाएगी। नवरात्रि को लेकर मंदिर और कलश की साफ-सफाई की जा रही है। नवरात्रि में मंदिर में यज्ञ, श्रीमद् देवी भागवत, दुर्गा सप्तशती पाठ, सतचंडी यज्ञ किया जाएगा। जसगीत होगा। देवी के आह्वान और घट स्थापना के लिए अभिजित मुहूर्त को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। 19 को अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:11 बजे से 12:58 बजे तक रहेगा। इस समय घट स्थापना करना शुभ रहेगा। चौघडिय़ा मुहूर्त सुबह 6:54 बजे से 8:06 बजे तक तथा 11:05 बजे से दोपहर 3:34 बजे तक भी घट स्थापना की जा सकती है। जो श्रद्धालु अष्टमी का व्रत करते हैं, वे 26 मार्च को अष्टमी पूजन कर कन्याओं को भोजन कराएंगे। इस दिन घरों और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना के साथ कन्या पूजन किया जाएगा। 27 को महानवमी के दिन नवरात्रि का समापन होगा। वहीं 26 मार्च को मध्याह्न में नवमी तिथि रहेगी। 27 मार्च को सूर्योदय नवमी तिथि में होने के कारण नवरात्रि का समापन उसी दिन होगा। 27 को पुनर्वसु नक्षत्र भी रहेगा, जो भगवान श्रीराम का जन्म नक्षत्र है। नक्षत्र गणना के हिसाब से रामनवमी नवरात्रि समापन पर 27 मार्च को मनाई जाएगी। 27 मार्च को पुनर्वसु और पुष्य नक्षत्र के युग्म संयोग और सर्वार्थ सिद्धि योग में रामनवमी मनाई जाएगी।

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