कोरबा। ठंड से बचने अलाव के समीप सो रही महिला को आग ने चपेट में ले लिया। वह अपने बचाव में कुछ कर भी नहीं सकी। उसे आग से घिरे देख परिजनों को भी कुछ समझ नही आया। उन्होंने पानी उड़ेलकर आग तो बुझा लिया, लेकिन बुजुर्ग महिला गंभीर रूप से झुलस गई। उसे बारह घंटे बाद इलाज के लिए सीएचसी दाखिल कराया गया, जहां से मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया गया। यहां सात दिन तक चले उपचार के बाद महिला की मौत हो गई। विडंबना तो यह है कि वैधानिक कार्रवाई पूरी होने से पहले ही बिचौलियों ने पीड़ित परिवार से संपर्क करना शुरू कर दिया।
घटना करतला थानांतर्गत ग्राम बड़मार में घटित हुई। दरअसल रजगामार पुलिस चौकी अंतर्गत ग्राम आमाड़ांड़ में गुरबारिन बाई अगरिया 56 वर्ष निवास करती थी। वह पति बिहानू की मौत के बाद घर में अकेली रह रही थी। दो साल पहले गुरबारिन बाई को लकवा हो गया, जिससे वह चलने फिरने में समर्थ नही थी। उसकी देखरेख बड़ी बहन का पुत्र लक्ष्मण सिंह अगरिया अपने घर बड़मार में रख कर रहा था। प्रतिदिन की तरह 8 जनवरी की रात भी ठंड से बचने गुरबारिन बाई अलाव के समीप सोई हुई थी। इसी दौरान रात करीब 10 बजे उसका कपड़ा आग के संपर्क में आ गया। वह आग से बचने कुछ भी नहीं कर सकी। उसे देखते ही देखते आग ने चपेट में ले लिया। इसी बीच लक्ष्मण अपनी पत्नी परमिला के साथ कमरे से बाहर निकला। उनकी नजर आग से घिरी मौसी पर पड़ी। उनकी चीख पुकार सुनकर परिजनों की नींद भी खुल गई। उन्होंनें कुछ नही सूझने पर पानी को उड़ेलकर आग बुझा दिया। जिससे लकवा पीड़ित महिला की जान तो बच गई, लेकिन वह गंभीर रूप से झुलस गई। परिजन पूरी रात जड़ी बूटी से बुजुर्ग महिला का उपचार करते रहे। उन्होने 9 जनवरी की सुबह दस बजे महिला को इलाज के लिए करतला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दाखिल कराया, जहां से प्राथमिक उपचार के पश्चात महिला को मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया गया। यहां करीब सप्ताह भर चले इलाज के बाद गुरूवार की सुबह महिला की मौत हो गई। डॉक्टरों ने मेमों तैयार कर अस्पताल पुलिस चौकी भेज दिया। पुलिस पीड़ित परिवार का बयान दर्ज करने में जुटी हुई थी। इस बीच बिचौलियों को घटना की भनक लग गई। वे वैधानिक कार्रवाई पूरी होने का भी इंतजार नही कर सके। बिचौलियों ने पीड़ित परिवार से मोबाइल पर संपर्क करना शुरू कर दिया। वे पीड़ित परिवार को हर संभव मदद करने का आश्वासन देने लगे। लगातार आ रहे कॉल से पुलिस की कार्रवाई में भी देर हो रही थी। लिहाजा परिजनों से कुछ देर मोबाइल पर बात नही करने समझाईश देनी पड़ी, तब कहीं जाकर प्रक्रिया पूरी हो सकी। बहरहाल पुलिस ने पीएम उपरांत शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया है।
रात में नहीं मिली एम्बुलेंस
घटना के 12 घंटे बाद गंभीर रूप से झुलसी महिला को पांच किलो मीटर दूर करतला सीएचसी दाखिल कराया गया। इस संबंध में पूछताछ करने पर पता चला कि घटना के तत्काल बाद महिला को चिकित्सालय ले जाने किसी मितानीन के पति से मदद मांगी गई। उसने पीड़ित परिवार को रात संजीवनी एक्सप्रेस अथवा डॉयल 112 की मदद नही मिलने की जानकारी दे दी। लिहाजा सरकारी योजना से अंजान पीड़ित परिवार सुबह होने का इंतजार करते रहे।
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