Thursday, February 19, 2026

अवैध हिरासत, फटकार लगाते हुए 25 हजार का जुर्माना

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अवैध हिरासत, फटकार लगाते हुए 25 हजार का जुर्माना

कोरबा। पति-पत्नी के विवाद में प्रशासनिक अफसर ने हस्तक्षेप तो किया, पर न्याय करने के बहाने खुद ही ऐसा अन्याय कर बैठे कि एक नागरिक के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हनन हो गया। पति को हिरासत में रखा, गिरफ्तारी हुई और फिर शाम 5 बजे यानी दफ्तर बंद होने के समय, ऐन जमानत के वक्त सॉल्वेंट श्योरिटी की शर्त लगा दी। डिमांड पूरी नहीं होने पर उसे जेल भेज दिया गया।
उच्च न्यायालय बिलासपुर में पेश रिट पिटिशन क्रिमिनल पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं विभू दत्त गुरु, न्यायाधीश ने सुनवाई करते हुए इसे अवैध हिरासत करार देते हुए इस कार्यवाही को पिटिशनर के मौलिक अधिकार का हनन बताया है। मामले में प्रतिवादी रहे सिटी मजिस्ट्रेट कोरबा, एसपी, एडिशनल कलेक्टर समेत राज्य शासन को फटकार लगाते हुए 25 हजार का जुर्माना ठोंका है, जिसका भुगतान 30 दिन के भीतर करना होगा। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर में प्रस्तुत डब्ल्यूपीसीआर नंबर 237 ऑफ 2024 के अनुसार क्वार्टर नंबर ईडब्ल्यूएस फेस-2 एमपी नगर थाना सिविल लाइंस रामपुर अंतर्गत लक्ष्मण साकेत (29 वर्ष) पिता गोकुल साकेत निवास करता है। उनकी ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता आशुतोष शुक्ला ने बताया कि कोरबा के सिटी मैजिस्ट्रेट के निर्देश पर बालकोकर्मी लक्ष्मण साकेत और पत्नी के बीच विवाद पर धारा 107, 16 लगाकर पुलिस कार्यवाही की गई। जब याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने जमानत के लिए बेल बांड पेश किया, तो जमानत दे दिया पर जब छोडऩे का समय आया तो शाम को पांच बजे सॉल्वेंट श्योरिटी का एक कंडिशन लगा दिया। शाम हो जाने के कारण लक्ष्मण साकेत की ओर से उनके अधिवक्ता सॉल्वेंट श्योरिटी पेश नहीं कर सके, जिसके चलते उन्हें गलत तरीके से जेल भेज दिया गया। यहां गौर करने वाली बात यह होगी कि सिटी मैजिस्ट्रेट को सॉल्वेंट श्योरिटी मांगने का अधिकार ही नहीं था। इस मामले में लक्ष्मण साकेत की ओर से हाईकोर्ट के अधिवक्ता आशुतोष शुक्ला द्वारा उच्च न्यायालय बिलासपुर में रिट पिटिशन क्रिमिनल (डब्ल्यूपीसी) पेश किया गया था। इस मामले की सुनवाई करते हुए बुधवार 21 अगस्त को उच्च न्यायालय बिलासपुर के मुख्य न्यायाधीश ने आदेश पारित किया है। न्यायालय ने राज्य शासन पर 25 हजार का जुर्माना लगाते हुए यह आर्डर पास करते हुए एडिशनल कलेक्टर द्वारा इसे अवैध हिरासत करार दिया है। राज्य शासन को कड़ी फटकार लगाते हुए कोर्ट ने 30 दिन के भीतर आदेश का पालन सुनिश्चित करने कहा है। साथ में न्यायालय ने यह टिप्पणी भी की है कि यह एक ग्रास वाइलेशन है, जिसमें एक नागरिक के जीवन की स्वतंत्रता के अधिकार का हनन किया गया है। उच्च न्यायालय ने इस मामले में कोरबा कलेक्टर, एडिशनल कलेक्टर, सिटी मैजिस्ट्रेट व पुलिस अधीक्षक समेत सभी संबंधितों को दोषी पाते हुए राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है और 30 दिन के भीतर कार्यवाही सुनिश्चित करने कहा गया है।

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