कोरबा। निजी स्कूलों के नर्सरी व केजी-1 कक्षाओं में पढ़ाने के इच्छुक गरीब परिवारों की राह शासन ने मुश्किल कर दी है। ऐसे बच्चों के अभिभावकों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 में नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा के अधिकार का लाभ नहीं मिल पाएगा। ऑनलाइन आरटीई पोर्टल के माध्यम से नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा के निजी स्कूलों की इन कक्षाओं की 25 फीसदी सीटों पर मिलने वाला एडमिशन इस बार नहीं होगा। शासन के इस निर्णय से जिले के 1339 सीटों पर हर साल नि:शुल्क पढ़ाई के लिए प्रवेश पाने वाले बच्चों के अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। इन अभिभावकों के सामने स्थिति यह है कि मोटी रकम खर्च कर निजी स्कूलों की इन कक्षाओं में अपने बच्चों को दाखिला दिलाएं या फिर किसी आंगनबाड़ी केन्द्र में पढ़ाएं। ऐसा भी नहीं कर पाने वाले अभिभावकों को अपने बच्चों को 6 साल की उम्र तक घर में बिठाकर रखना होगा, ताकि उस उम्र के बाद वे आरटीई के तहत दाखिला दिला सकें। यह विकल्प अभिभावकों के लिए काफी जटिल होगा और वे नहीं चाहेंगे। इसलिए अंतिम विकल्प यह है कि वे किसी न किसी सरकारी स्कूल में अपने बच्चे को पढ़ाएं। आरटीई पोर्टल से भी नर्सरी एवं केजी 1 क्लासों की सीटों को हटा दिया गया है, ताकि पंजीयन कराने वाले अभिभावकों को उसकी जानकारी च्वाइस सेंटर अथवा अन्य माध्यम से मिल सके।
गवर्नमेंट सेजस पर नहीं है एंट्री क्लासेस
कोरबा जिले में गवर्नमेंट स्वामी आत्मानंद स्कूलों की संख्या 55 है। लेकिन अंग्रेजी माध्यम के स्कूल मात्र 15 हैं। इसमें भी मात्र 3 स्कूल सीबीएसई से संबद्ध हैं, शेष पहले की तरहह सीजी बोर्ड से संबद्धता बनाए हुए हैं। इन स्कूलों में भी आरटीई के तहत नर्सरी व केजी-1 की कक्षाएं नहीं लगती हैं। पहली कक्षा में प्रवेश के लिए इन स्कूलों का दायरा सीमित होने के कारण बड़ी संख्या में बच्चों का एडमिशन वहां नहीं हो पाता है। सीबीएसई से संबद्ध तीनों सेजस स्कूलों में 50 फीसदी सीट छात्राओं के लिए रिजर्व हैं। जबकि 50 प्रतिशत सीट पर एसई, एसटी, ओबीसी, दिव्यांग, सैनिक आदि कोटे से एडमिशन का प्रावधान है।
बीते वर्ष 2338 बच्चों का हुआ था प्रवेश
शैक्षणिक सत्र 2025-26 में जिले के 289 निजी स्कूलों की नर्सरी, केजी-1, 1ली सहित अन्य कक्षाओं की रिक्त सीटों पर आरटीई के तहत 2338 बच्चों को दाखिला मिला था। जिसमें नर्सरी, केजी-1 व 1ली कक्षा में आरटीई की कुल सीट 1901 थी। चालू सत्र 2026-26 में आरटीई के बदले नियम के तहत जिले के 281 निजी स्कूलों की मात्र 562 सीटों पर ही प्रवेश दिया जाना है। क्योंकि इतनी सीट कक्षा 1 में आरटीई की रह गई है। छात्र पंजीयन की प्रक्रिया 16 फरवरी से शुरू हो चुकी है।
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