Saturday, February 28, 2026

आश्रितों को नौकरी का मामला बंद नहीं होने दिया जाएगा: पांडेय

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आश्रितों को नौकरी का मामला बंद नहीं होने दिया जाएगा: पांडेय

कोरबा। जेबीसीसीसीआई सदस्य व कोयला मजदूर सभा के केंद्रीय महामंत्री नाथूलाल पांडेय ने कहा कि आश्रितों को नौकरी का मामला बंद नहीं होने दिया जाएगा। इसी तरह कई खदानों को एमडीओ मोड में देने की कोशिश प्रबंधन द्वारा की जा रही है, पर चालू खदान को नहीं देने दिया जाएगा। यदि प्रबंधन ऐसा रास्ता अख्तियार करता है तो संगठन इसका विरोध करेगा और जरूरत पड़ी, तो आंदोलन का रास्ता अख्तियार किया जाएगा।उन्होंने कहा कि महिलाओं को भी रोस्टर में रखने का कार्य शुरू कराया जाएगा। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि ठेका मजदूरों के लिए हाईपावर कमेटी (एचपीसी) द्वारा वेजेस निर्धारित किया गया है, पर मजदूरों को नहीं दिया है।एसईसीएल कुसमुंडा प्रवास पर आए पांडेय ने कहा कि कोल इंडिया में हिंद मजदूर सभा (कोयला मजदूर सभा) अन्य संगठनो की तुलना में सदस्यता के दृष्टिकोण से बड़ा है। ठेकेदारों द्वारा बैंक भुगतान किया जाता है, पर बाद में राशि वापस ले लेते हैं। इसे रोकने का प्रयास किया जा रहा है और महाप्रबंधक इसके लिए जिम्मेदार होता है, ताकि मजदूरों को पूरी राशि मिले। उन्होंने कहा कि प्रबंधन को यह ध्यान रखना होगा कि कर्मियों से पैसा वापस न लिया जा सके। पांडेय ने कहा कि ठेका कर्मियों के आश्रितों को भी अनुकंपा नियुक्ति मिलेगी। इस बारे में एचएमएस ने प्रस्ताव रखा है और कोशिश हो रही है कि जल्द ही इस लागू किया जाएगा। दुर्घटना में मृत होने पर संबंधित ठेका कर्मियों के स्वजनों को काफी दिक्कत झेलनी पड़ती है। इसलिए इस प्रस्ताव पर अमल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि खदान में कार्यरत ट्रक, जीप समेत अन्य वाहन चालक समेत सभी कर्मी एचपीसी दर के अंतर्गत आ गए हैं। माइंस एक्ट में सभी पर लागू होता है। इसलिए प्रबंधन को इस पर ध्यान रखते हुए राशि निर्धारित दर के मुताबिक भुगतान कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भू-विस्थापित महिला हो या फिर किसी अन्य मामले में आश्रित महिला को अब रोजगार मिलेगा। यह निर्धारित हो चुका है। भू विस्थापितों के परिवार में बेटी चाहे शादीशुदा भी क्यों न हो, फीमेल एंप्लायमेंट को कंपनी ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। चर्चा के दौरान पांडेय ने बताया की एचएमएस कोल इंडिया की सबसे बड़ी श्रमिक संगठन होने के नाते श्रमिकों के हितों में हर लड़ाई में आगे रहती है जिसके फलस्वरूप कंपनी किसी भी सब्सिडियरी के कोई भी हिस्से को निजीकरण करने में असफल रही है।

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