Wednesday, February 25, 2026

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिँग स्टेशन जल्द शुरू करने की कवायद, शहर में चलने वाले 6000 से भी अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलेगी सुविधा

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कोरबा। शहर में चलने वाले 6000 से भी अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिँग स्टेशन की सुविधा जल्द शुरू होने वाली है। निगम प्रशासन की ओर से सुनालिया चौक के समीप मल्टीलेवल पार्किंग और स्मृति उद्यान के निकट शेड तैयार किया गया है। 50 लाख की लागत से चार्जिंग मशीन भी खरीदी की जा चुकी है लेकिन 3 माह बीत जाने के बाद भी मशीन के लिए पावर सप्लाई की व्यवस्था नहीं की गई है।
सुविधा के अभाव में लो बैटरी होने पर वाहन चालकों को घर वापस लौटना पड़ रहा है। केंद्र सरकार के नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत यह चार्जिंग स्टेशन स्थापित किये जा रहे हैं। कोरबा शहर देश के सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में शामिल है, जहां इको फ्रेंडली ग्रीन एनर्जी वाले ई-व्हीकल को बढ़ावा देने के लिए चार्जिंग स्टेशन स्थापित किया जा रहा है.पेट्रोल डीजल की बढ़ती कीमतों के चलते तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की डिमांड बाजार में बढ़ी है। निजी हो चाहे कमर्शियल लोग ई-व्हीकल की ओर रुख करने लगे हैं। जिस तादाद में शहर में दौड़ने वाली ई-रिक्शा की बढ़त हो रही उससे अनुसार शहर में चार्जिंग प्वाइंट का होने आवश्यक हो गया है। बात करें ई रिक्शा की तो, 3 साल पहले शहर में ई-रिक्शा की संख्या 100 थी, जो अब बढ़कर 1500 हो चुकी है। सामान्य तौर पर ई-रिक्शा फुल चार्ज करने पर 70 से 80 किलोमीटर की दूरी तय करता है। वर्तमान में चार्जिंग स्टेशन नहीं होने से वाहन चालक लंबी दूरी सवारी नहीं ले जा रहे हैं। उन्हे हमेशा इस बात का डर होता है कि यात्री सेवा देते समय कहीं चार्जिंग खत्म न हो जाए। वाहनों की संख्या में बढ़ोतरी को देखते हुए वाहन चालकों चार्जिंग स्टेशन की लंबे समय से मांग थी। ई-वाहन चालक घर में रात भर चार्चिंग करते हैं, जो पूरे दिन वाहन चलाने के लिए यह पर्याप्त नहीं होता।

रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड में सबसे ज्यादा जरूरत
ई-रिक्शा संचालकों की ओर से शहर के बस और रेलवे स्टैंड में चार्जिंग प्वाइंट की मांग की जा रही है। यहां सुविधा होने से अधिक दूरी तक सफर करने वाले यात्रियों को पूरी तरह रिचार्ज वाहन का विकल्प चुनने में सहूलियत होगी। शहर में चार्जिंग प्वाइंट नहीं होने की वजह से कई गैरेज संचालकों ने हूकिंग की बिजली से सेवाएं देना शुरू कर दिया है। इससे न केवल विद्युत वितरण विभाग को घाटा हो रहा है, बल्कि सप्लाई तार पर भी भार बढ़ रहा है. मामले को गंभीरता से नहीं लेने के चलते बिजली चोरी की संभावना बढ़ गई है।

18 प्रतिशत प्रदूषण पेट्रोल बाइक और आटो से हो रहा
शहर में चिमनी और भारी वाहनों ने निकलने वाली धुआं के साथ कुल प्रदूषण 18 प्रतिशत भाग अकेले ऑटो और दोपहिया वाहनों से निकलती है। चार्चिंग प्वाइंट खुलने से लोगों की निर्भरता बढ़ेगी। सड़कों पर होने वाले प्रदूषण से राहत मिलेगी। ई-रिक्शा की संख्या शहर ही नहीं उपनगरीय क्षेत्रों में भी बढ़ रही है। यहां भी चार्जिंग प्वाइंट की जरूरत महसूस की जा रही। सुविधा मिलने से यहां भी पेट्रोल और डीजल वाहन की संख्या में कमी आएगी। स्थानीय निकाय की ओर शहर चार्जिंग प्वाइंट खोलने से राजस्व लाभ भी मिलेगा, रोजगार भी बढ़ेगा।

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