कोरबा। बोर्ड और अन्य प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के दौरान छात्र-छात्राओं पर मानसिक दबाव बढ़ जाता है। ऐसे समय में केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि संतुलित खानपान और नियमित दिनचर्या भी सफलता की कुंजी मानी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सही भोजन और पर्याप्त नींद से एकाग्रता, स्मरण शक्ति और ऊर्जा स्तर बेहतर रहता है।
विशेषज्ञों के अनुसार परीक्षा के दिनों में सुबह का नाश्ता छोड़ना नुकसानदायक हो सकता है। नाश्ते में दलिया, पोहा, उपमा, अंडा, दही, दूध, फल या अंकुरित अनाज शामिल करना लाभकारी है। इससे शरीर को ग्लूकोज की संतुलित आपूर्ति होती है और दिमाग सक्रिय रहता है। खाली पेट परीक्षा देने जाने से चक्कर, घबराहट या कमजोरी महसूस हो सकती है। दोपहर और रात के भोजन में ज्यादा तला-भुना और मसालेदार भोजन से बचने की सलाह दी गई है। दाल, चावल, रोटी, हरी सब्जियां और सलाद जैसे संतुलित आहार लेने से पाचन ठीक रहता है और आलस्य नहीं आता। ज्यादा भारी भोजन करने से नींद और सुस्ती बढ़ सकती है, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है। दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी जैसे पेय शरीर को हाइड्रेट रखते हैं। अधिक चाय-कॉफी से बचना चाहिए, क्योंकि इससे नींद पर असर पड़ सकता है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा के समय देर रात तक जागने की बजाय नियमित समय पर सोना और कम से कम 6-8 घंटे की नींद लेना आवश्यक है। पढ़ाई के बीच-बीच में छोटे ब्रेक लेने से मानसिक थकान कम होती है। सुबह हल्का व्यायाम या टहलना भी लाभकारी माना गया है।
अभिभावकों को निभानी होगी भूमिका
माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें और सकारात्मक माहौल बनाए रखें। घर में शांत वातावरण और समय पर भोजन की व्यवस्था छात्रों के आत्मविश्वास को बढ़ाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा में अच्छे प्रदर्शन के लिए केवल अधिक पढ़ाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि संतुलित आहार, सही दिनचर्या और मानसिक संतुलन भी उतना ही जरूरी है।
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