एसईसीएल की 3 खदानों में आधुनिक तकनीक का होगा इस्तेमाल, पेस्ट फिल तकनीक से खनन प्रस्तावित, बढ़ेगा उत्पादन
कोरबा। एसईसीएल कोरबा एरिया की सिंघाली भूमिगत खदान में पेस्ट फिल तकनीक से कोयला खनन को लेकर समझौते के बीच अब दूसरी अन्य खदानों में भी यह तकनीक अपनाएगी जाएगी। एरिया की ही ढेलवाडीह खदान समेत एसईसीएल की तीन खदानों में पेस्ट फिल तकनीक से कोयला खनन प्रस्तावित है। अब तक एसईसीएल की भूमिगत खदानों में बोर्ड एंड पिलर पद्धति से कोयले का खनन किया जाता रहा है। इस पद्धति में बीच-बीच में मोटा पिलर भी छोड़ा जाता है। इस कारण पिलर में मौजूद कोयला भी नहीं निकाला जाता है। खदान के आसपास रहने वाली आबादी की सुरक्षा को ध्यान में रखकर यह पिलर छोड़ा जाता है, लेकिन अब भूमिगत खदान को कोयला निकालने के बाद पेस्ट फिल पद्धति से भरा जाएगा। ढेलवाडीह के साथ ही राजनगर आरओ और हसदेव एरिया की बिजुरी माइंस में पेस्ट फिल तकनीक से कोयला खनन प्रस्तावित है। इस तकनीक से कोयला खनन के बाद पेस्ट भरने टेंडर व अन्य जरूरी प्रक्रियाओं को पूरा किया जाएगा। इससे अनुभवी कंपनियों को टेंडर लेने का मौका मिलेगा। सिंघाली खदान में पेस्ट फिल तकनीक से कोयला निकालने टीएमसी कंपनी के साथ एसईसीएल ने समझौता किया है। खदान में अनुमानित रिजर्व कोयले को निकालने 25 साल की अवधि तय की गई है। समय पर पर्यावरणीय मंजूरी नहीं लेने से एसईसीएल कोरबा एरिया की कई भूमिगत खदानों से कोयला खनन प्रभावित हुआ। अघोषित रूप से माइंस बंद होने के बाद कोयला कर्मियों का भी तबादला किया गया।
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बंद खदानों से शुरू किया जा रहा खनन
अब नई तकनीक से खनन कार्य के लिए बंद खदानें खोली जा रही है। इसके लिए अनुभवी कंपनियों से समझौता किया जा रहा है। तीन प्रस्तावित माइंस में कंटीन्यूअस माइनर मशीन से भी खनन होगा। ढेलवाडीह खदान की सालाना 0.66 मिलियन टन, राजनगर आरओ की 0.36 मिलियन टन और बिजुरी माइंस की 0.36 मिलियन टन सालाना उत्पादन क्षमता है। भविष्य में एसईसीएल की तीन और खदानों में भी पेस्ट फिल तकनीक से खनन किया जा सकता है। इसकी भी तैयारी है। एसईसीएल की तीन खदान ढेलवाडीह, राजनगर आरओ व बिजुरी में पेस्ट फिल तकनीक से कोयला खनन प्रस्तावित है। टेडरिंग की प्रक्रिया के बाद ही यह तकनीक उपयोग में लाएंगे। सिंघाली के बाद अब इन तीन खदानों पर भी प्रबंधन ने फोकस किया है।
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