बांकी मोंगरा में श्रीमद्भागवतगीता की बयार बहने लगी ।यह आयोजन बांकी मोंगरा के वार्ड क्रमांक 5 में मनोरंजन केंद्र में हो रहा है ।
आज कथा का प्रथम दिवस में नगर वासियों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।
कथा के प्रथम दिवस पर मंच के माध्यम से आचार्य जी ने बताया कि
श्रीमद भगवत कथा से लोगों में भगवान के प्रति श्रद्धा और भक्ति का संचार हो रहा है। कथा में कर्मयोग, आत्म-ज्ञान और भक्ति योग का महत्व बताया जा रहा है। पंडित श्याम दुबे ने इंद्रिय संयम और जीवन में संतुलन पर विशेष जोर दिया है।
कथा में बताया जा रहा है कि आत्मा अजर-अमर है, जबकि शरीर नश्वर है। इच्छाओं पर नियंत्रण और मन को संयमित करने की शिक्षा दी जा रही है। सत्संग से धैर्य, सदाचार और सेवा जैसे गुणों की प्राप्ति होती है। कथा में कर्तव्य पालन और ज्ञान के महत्व पर भी प्रकाश डाला जा रहा है।
भगवान के प्रति समर्पण और भक्ति से आत्मा की शुद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। सुख-दुख को समभाव से स्वीकार करने और कर्म पर ध्यान केंद्रित करने का संदेश दिया जा रहा है। आत्मज्ञान को मोक्ष प्राप्ति का मार्ग बताया गया है। कथा में सत्य के मार्ग पर चलने और क्रोध से दूर रहने की सीख भी दी जा रही है।
कुरुक्षेत्र युद्ध के प्रारंभ में अर्जुन के मोह और विषाद का वर्णन करते हुए बताए की, जहाँ वे अपने सगे-संबंधियों को युद्ध में देखकर धनुष त्याग देते हैं और श्रीकृष्ण से मार्गदर्शन मांगते हैं, जिसमें संजय धृतराष्ट्र को दोनों सेनाओं का वर्णन सुनाते हैं। प्रथम दिवस में अर्जुन युद्ध से निवृत्ति और कुल-नाश के पाप के भय से व्याकुल होकर श्रीकृष्ण की शरण में आते हैं, जो आगे के उपदेश का आधार बनता है।
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