कोरबा। इंडिया लिमिटेड ने शुक्रवार को पत्र जारी कर पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था के आधार पर अपकीप अलाउंस का तुलनात्मक विवरण दिया गया है। पत्र के अनुसार जिस कोयला कर्मी की आय 12 लाख के आसपास है तो नई टैक्स व्यवस्था फायदेमंद हो सकती है, क्योंकि इसमें टैक्स छूट की सीमा अधिक है, जिससे भत्ते पर टैक्स का बोझ कम या शून्य हो जाएगा। सबसे बड़ा अंतर टैक्स छूट की सीमा में है, जो यह निर्धारित करता है कि किस आय तक आपको कोई परक्यूजिट टैक्स नहीं देना होगा। पुरानी टैक्स व्यवस्था धारा 87ए के तहत 5 लाख तक की कुल कर योग्य आय पर कोई टैक्स देनदारी नहीं है। नई व्यवस्था फाइनेंस एक्ट-2025 के संशोधन के बाद 12 लाख तक की कुल आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। भत्ते की दर आयकर स्लैब और शहर की जनसंख्या पर निर्भर करती है। आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 87ए को वित्त अधिनियम 2019 द्वारा संशोधित किया गया है। जिसके अनुसार 5 लाख रुपए या उससे कम की कुल कर योग्य आय वाले करदाता पर कोई आयकर दायित्व नहीं होगा। इसके अतिरिक्त वित्त अधिनियम 2025 ने आयकर अधिनियम 1961 की धारा 87 ए को संशोधित करके नई कर व्यवस्था के तहत धारा 87 ए के अंतर्गत कर छूट की सीमा को 7 लाख रुपए से बढ़ाकर 12 लाख रुपए कर दिया है। इसका यह भी तात्पर्य है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए यदि किसी कर्मचारी की कुल आय (अनुलाभ आय सहित) पुरानी कर व्यवस्था के अनुसार 5 लाख रुपए या उससे कम है और नई कर व्यवस्था के अनुसार 12 लाख रुपए या उससे कम है, तो उस पर अनुलाभ कर का कोई भार नहीं होगा।
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