Thursday, February 19, 2026

कोरबा के कोल माइंस को लक्ष्य हासिल करने लगाना होगा जोर, 2 माह 21 दिन में 57.29 मिलियन टन कोयला का उत्पादन की चुनौती

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कोरबा के कोल माइंस को लक्ष्य हासिल करने लगाना होगा जोर, 2 माह 21 दिन में 57.29 मिलियन टन कोयला का उत्पादन की चुनौती

कोरबा। कोरबा जिला में स्थित एसईसीएल की कोयला खदानों ने एक बार फिर उत्पादन का कीर्तिमान रच दिया है। खदानों ने मौजूदा वित्तीय वर्ष में 100 मिलियन टन से अधिक कोयला उत्पादन कर लिया है। कोरबा की खदानों को 157.72 मिलियन टन कोयला का उत्पादन करना है। वित्तीय वर्ष के 9 माह 10 दिन में 100.43 मिलियन टन कोयला उत्पादन के बाद अब शेष बचे 2 माह 21 दिन में 57.29 मिलियन टन कोयला का उत्पादन करना होगा। एसईसीएल की मेगा परियोजनाओं के प्रदर्शन पर ही पूरा दारोमदार रहेगा। एसईसीएल का सर्वाधिक कोयला कोरबा की खदानों से ही निकाला गया है। मेगा परियोजनाओं से ही 90 मिलियन टन से अधिक कोयला का उत्पादन हुआ है। एसईसीएल को मौजूदा वित्तीय वर्ष (1 अप्रेल 2023 से 31 मार्च 2024 तक) में 197 मिलियन टन कोयला उत्पादन का टारगेट दिया गया है। इस टारगेट में 157.72 मिलियन टन कोयला उत्पादन कोरबा जिले की मेगा परियोजना गेवरा, दीपका व कुसमुंडा सहित कोरबा एरिया की खदानों से किया जाना है। अब तक की स्थिति में एसईसीएल ने 197 लक्ष्य के मुकाबले 128.9 मिलियन टन कोयला का उत्पादन किया है। जिसमें अकेले कोरबा जिले की खदानों में 100.43 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया है। इस कीर्तिमान को कोरबा की खदानों ने 10 जनवरी को हासिल किया है। वित्तीय वर्ष में गेवरा को 60 मिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य दिया गया है। उत्पादन के सैकड़े में सर्वाधिक कोयला गेवरा से 39.45 मिलियन टन निकाला गया है। कुसमुंडा ने 50 मिलियन टन के मुकाबले 32.24, दीपका ने 40 के मुकाबले 22.28 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया है। कोरबा एरिया को 7.72 मिलियन टन का टारगेट है। एरिया ने इस अवधि तक 6.46 मिलियन टन कोयला उत्पादन कर लिया है। एरिया लक्ष्य के काफी करीब है। शेष दिनों में एरिया उत्पादन और डिस्पैच में लक्ष्य से आगे निकल जाएगी। एसईसीएल को उत्पादन की तरह 197 मिलियन टन कोयला का उठाव भी करना है। अब तक की स्थिति में कंपनी को 150 मिलियन टन से अधिक कोयला उठाव कर लेना था। इसके मुकाबले लगभग 137 मिलियन टन कोयला का उठाव किया गया है। कंपनी लगभग 14 मिलियन टन उठाव से पीछे है। कोरबा जिला कमाऊपूत कहा जाता है। जिले ने एक बार फिर इस बात को कोयला उत्पादन क्षेत्र में साबित किया है। 100 मिलियन टन उत्पादन के कारण राजस्व कमाई में इजाफा होना तय है। जानकार बताते हैं कि क्षेत्र में राजस्व कमाई के आधार पर डीएमएफ, सीएसआर मद जारी और खर्च होते हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि इस बार भी कोरबा को डीएमएफ और सीएसआर मद के रूप में भारी भरकम राशि मिलेगी।

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