Thursday, January 22, 2026

कोलकर्मियों को 7.7 फीसदी ब्याज पर बनी सहमति, प्रक्रिया पूरी होने पर आगामी वित्तीय वर्ष के लिए नई दरें होंगी लागू

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कोरबा। दो साल से कोयला कर्मियों के सीएमपीएफ पर ब्याज दरें नहीं बढ़ाई गई हैं। हालांकि आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में 7.7 फीसदी ब्याज दर का निर्धारण करने पर सहमति बनी है। अब आगे की प्रक्रिया पूरी करने के बाद नई दरें लागू की जाएगी। कोयला कर्मियों के कोल माइंस प्रोविडेंट फंड (सीएमपीएफ) अकाउंट में हर महीने वेतन से निश्चित राशि जमा होती है। हर वित्तीय वर्ष के लिए ब्याज दर का निर्धारण किया जाता है। इसी के हिसाब से पीएफ पर ब्याज मिलता है। मार्च 1991 से मार्च 2000 तक कोयला कर्मियों को 12 फीसदी की दर से ब्याज मिल रहा था, लेकिन मार्च 2001 के बाद यह लगातार घटा है। मार्च 2022 में 8 प्रतिशत ब्याज दर थी, लेकिन पिछले दो वित्तीय वर्ष से 7.6 प्रतिशत सीएमपीएफ पर ब्याज दर का निर्धारण किया गया, जो 40 साल में कोयला कर्मियों को पीएफ जमा पर सबसे कम ब्याज दर है। इस पर निर्णय बोर्ड ऑफ ट्रस्टी (बीओटी) की बैठक में लिया जाता है। ट्रेड यूनियनों के चार प्रतिनिधि भी सदस्य होते हैं। इसी बैठक में 7.7 फीसदी ब्याज दर के निर्धारण पर सहमति बनी है। अब आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद ही आगामी वित्तीय वर्ष के लिए नई दरें लागू होंगी। यूनियन नेताओं ने बताया कि बीओटी की बैठक में कोयला कर्मियों के पीएफ पर 7.7 फीसदी ब्याज दर के निर्धारण पर निर्णय लिया है। आगे की प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही आधिकारिक तौर पर आदेश जारी किया जाएगा।
सीएमपीएफ मेंबरों को नई दर से ब्याज का लाभ मिलेगा
वित्तीय वर्ष 2024-25 में ब्याज 7.6 फीसदी निर्धारित थी। सहमति बनने अब उम्मीद जागी है कि 7.7 फीसदी की नई दर के अनुसार सीएमपीएफओ में सदस्य कोयला कर्मियों को ब्याज दर मिलेगा। हालांकि बीते कुछ वर्षों में ब्याज दर में जिस तरह से कटौती की गई है, इसे ध्यान में रखते हुए कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है। हर वित्तीय वर्ष के लिए ब्याज दर का निर्धारण किया जाता है। इसी हिसाब से कोयला कर्मियों को राशि का भुगतान किया जाता है। ब्याज दरें घटाने का नुकसान कोयला कर्मियों को रिटायरमेंट के समय होता है। अनुमान से कम राशि मिलती है।

फंड में कोल कंपनियां व कर्मियों का अंशदान बराबर
कोयला कर्मियों के मूल वेतन से 12 फीसदी राशि सीएमपीएफ के रूप में कटौती की जाती है। इतने ही प्रतिशत के हिसाब से राशि कोल इंडिया के सहयोगी कंपनियां देती है। कोयला कर्मियों के निवेश की राशि सरकार शेयर में लगाती है। इस निर्णय के खिलाफ पूर्व में श्रमिक संगठनों का विरोध सामने आ चुका है, इसे उनके नुकसान की वजह बता चुके हैं।

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