गरीब परिवार के बच्चों के लिए नि:शुल्क शिक्षा की राह नहीं आसान, 2065 सीट पर दाखिला पाने अब तक 11 हजार 574 आवेदन, अभी समय शेष
कोरबा। शिक्षा के अधिकार के तहत निजी स्कूलों में दाखिला के लिए मारामारी रहेगी। निर्धारित सीट से कहीं ज्यादा आवेदन जमा हुए हैं। जबकि अभी आवेदन के लिए 1 माह से अधिक समय बचे हैं। नि:शुल्क अध्ययन की सुविधा शासन ने दी है। पंजीकृत निजी स्कूलों में कुल सीट की तुलना में 10 फीसदी सीटों पर बीपीएल परिवार के बच्चों को प्रवेश देना है। शैक्षणिक सत्र 202 -25 में दाखिला देने बच्चों का आनलाइन पंजीयन मार्च से शुरू हो चुका है। पंजीयन शुरू होने के 11 दिन में ही 11 हजार 574 बच्चों के अभिभावकों ने आनलाइन पंजीयन करा लिए हैं, जबकि जिले के निजी स्कूलों में आरटीई के तहत सिर्फ 2065 सीट ही है। इन सीटों पर प्रवेश देने अब भी पंजीयन कराने एक माह से अधिक समय बचा है। इससे यह तय हो गया है कि जिनके दस्तावेज पूरे होंगे, उनकी संख्या भी तय सीटों से अधिक होंगी और उन्हें भी एडमिशन पाने काफी जद्दोजहद करनी पड़ सकती है। इतना ही नहीं, अधि ांश बच्चों को दाखिला भी नहीं मिल पाएगा। प्रवेश पंजीयन के लिए पहले चरण की अंतिम तिथि 15 अप्रैल निर्धारित है।जिले में 303 निजी स्कूल, लेकिन पंजीयन 293 का जिले में निजी स्कूलों की संख्या 303 है, लेकिन शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत बच्चों को दाखिला देने शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर पंजीकृत निजी स्कूलों की संख्या 293 है। पंजीकृत इन स्कूलों में भी अधिकांश ऐसे हैं, जहां शहरी क्षेत्र के अभिभावक अपने बच्चों को प्रवेश दिलाने में रुचि नहीं रखते हैं। यही स्थिति ग्रामीण व उपनगरीय क्षेत्र के निजी स्कूलों में भी रहती है। अधिकांश अभिभावक बड़े इंग्लिश मीडियम स्कूलों में भी दाखिला दिलाना चाहते हैं। इसके कारण वहां ऑनलाइन पंजीकृत बच्चों की संख्या अधिक रहती है।प्रवेश पाने 2011 की जनगणना में रिकार्ड होना आवश्यक आरटीई के तहत निजी स्कूलों में अपने बच्चों को प्रवेश दिलाना हर अभिभावक चाहते हैं, लेकिन सफलता उन्हें मिलती है, जो पात्र होते हैं। यहां बताना होगा कि इसके लिए अभिभावक का रिकार्ड बीपीएल सूची में होना जरूरी है। साथ ही वर्ष 2011 में हुई जनगणना में अभिभावक का नाम शामिल होना जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर आवेदन पहले ही अमान्य हो जाता है, इसलिए यह जरूरी है कि अगर आवेदन कर रहे हैं तो यह जांच लें कि आपका नाम बीपीएल सर्वे सूची और जनगणना में शामिल है या नहीं। अधिकांश अभिभावक प्रवेश नहीं मिलने पर बच्चों को पढ़ा नहीं पाते हैं।
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