कोरबा। शहर में किसी बड़े आयोजन, वीआईपी आगमन, किसी राजनीतिक पद पर नियुक्ति व किसी जनप्रतिनिधि या बड़े नेता के जन्मदिन के मौके पर शहर के टीपीनगर चौक व सीएसईबी चौक अवैध होर्डिंग्स फ्लैक्स से पट जाते हैं। एक तरह से उक्त दोनों चौराहें प्रमुख रूप से नियुक्ति व जन्मदिन की बधाई देने के अड्डे बन गए हैं। हालांकि इसके अलावा हर दूसरे चौराहों व खंभों पर भी होर्डिंग्स व फ्लैक्स लगाए जाते हैं। शहर के चौक-चौराहों पर अवैध रूप से होर्डिंग्स-फ्लैक्स लग रहे हैं। राजनीतिक, धार्मिक व सामाजिक संगठन नियमों का मजाक उड़ाते हुए चौक-चौराहों और खंभों में होर्डिंग्स-फ्लैक्स लगा रहे हैं। दूसरी ओर नगर निगम की ओर से सख्ती की चेतावनी देने के बाद भी कार्रवाई नहीं की जा रही है। ऐसे में एक-दूसरे को देखकर मनमानी तरीके से होर्डिंग्स-पलैक्स लगाने का सिलसिला बढ़ने लगा है। शहर में सबसे व्यवस्तम टीपीनगर चौक व सीएसईबी चौक पर मुख्य रूप से बीचों-बीच होर्डिंग्स-पलैक्स लगाए जा रहे हैं, जिससे सड़कों पर आवाजाही कर रहे वाहन चालकों को सिग्नल स्पष्ट नजर नहीं आता है। वहीं दूसरे दिशा की ओर से तेजरफ्तार में आने पर दिखाई भी नहीं देता जिसकी वजह से अक्सर वाहनों के बीच टक्कर हो जाती है। करीब 2 माह पहले नगर निगम के अतिक्रमण दस्ते ने ऐसे होर्डिंग्स-फ्लैक्स जब्त करने की कार्रवाई की थी, लेकिन वह भी महज खानापूर्ति साबित हुई, क्योंकि अगले ही दिन से फिर से चौक-चौराहों पर होर्डिंग्स-फ्लैक्स नजर आने लगे। राहगीरों की परेशानी पहले की तरह बरकरार है। नगर निगम की टीम शहर के चौक-चौराहों के अलावा सड़क किनारे व स्ट्रीट लाइट के खंभों में लगने वाले अवैध होर्डिंग्स-फ्लैक्स की कार्रवाई के लिए नगर निगम का अतिक्रमण दस्ता निकलता है। दूसरी ओर ऐसे ज्यादातर होर्डिंग्स-फ्लैक्स राजनीतिक दल से जुड़े लोगों के होते हैं, इसलिए राजनीतिक दल के प्रभाव से टीम को बैरंग या खानापूर्ति करके वापस लौटना पड़ता है। यहीं कारण है कि टीम भी आंख फेर लेती है।
निर्देश के बाद भी कार्रवाई नहीं
हाई कोर्ट में याचिका लगने के बाद नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा शहर के सरकारी (बिजली) खंभों से अवैध केबल व इंटरनेट तारों को 8 जनवरी से 1 सप्ताह के भीतर हटाने का निर्देश जारी किया था। लेकिन तय तिथि को लगभग एक माह गुजरने के बाद भी शहर में किसी भी खंभे से अवैध केबल व इंटरनेट के तार नहीं हटाए गए। न ही नगर निगम ने समय सीमा के बाद कार्रवाई की है। जबकि निर्देश के अनुसार नगर निगम को ऐसे तारों को हटाकर खर्च केबल ऑपरेटर्स से वसूल करना था।
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