Wednesday, February 11, 2026

नगर निगम के लेखाधिकारी देशमुख को कमीशन का चढ़ावा फिर चेक होता है क्लियर, ठेकेदारों ने लगाया गंभीर आरोप, मामले की कलेक्टर से की शिकायत

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नगर निगम के लेखाधिकारी देशमुख को कमीशन का चढ़ावा फिर चेक होता है क्लियर, ठेकेदारों ने लगाया गंभीर आरोप, मामले की कलेक्टर से की शिकायत

कोरबा। नगर पालिक निगम के लेखाधिकारी अशोक कुमार देशमुख पर ठेकेदारों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कलेक्टर से शिकायत की है। उनका कहना है कि लेखाधिकारी अपने पद का दुरूपयोग कर निगम कोष को क्षति पहुंचा रहे हैं। शिकायत में लिखा है कि सडक़ मरम्मत पर 30 लाख स्वीकृत हुए थे पर लेखाधिकारी ने 32 लाख का भुगतान कर दिया। इतना ही नहीं, वे घर घर जाकर ठेकेदारों से कमीशन वसूल रहे हैं और जो उन्हें राजी खुशी कमीशन देते हैं, उनका चेक आसानी से क्लियर भी हो जाता है। ठेकेदारों ने लेखाधिकारी अशोक देशमुख को हटाकर किसी अन्य की पदस्थापना करने की गुहार लगाई है। कलेक्टर को लिखे पत्र के अनुसार अशोक कुमार देशमुख लेखा अधिकारी द्वारा अपने पद का दुरूपयोग करते हुए नगर निगम को वित्तीय क्षति पहुंचाई जा रही है। इसमें बताया गया है कि जीर्ण शीर्ण सडक़ों का मरम्मत कार्य के मद के लिए 30 लाख की स्वीकृति प्रदान की गई थी। पर भुगतान 32 लाख रूपए लिया गया है। इस तरह से 2 लाख का खर्च किया गया, जिसकी स्वीकृति सक्षम अधिकारी यानी आयुक्त से नहीं ली गई, जो रोकी जा सकती थी। शासन से स्वीकृति उपरांत भुगतान किया जाना था। यह कृत्य वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। यह भी लिखा गया है कि यूआईपीए के तहत शासन से प्राप्त राशि का दूसरे मद में व्यय कर दिया गया है, जो कि शासन के निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है, पर कमीशनखोरी के चक्कर में भुगतान कर दिया गया है। देशमुख द्वारा सभी ठेकेदारों के घर-घर जाकर 4.5 प्रतिशत का कमिशन लिया जा रहा है। जबकि आयुक्त के सख्त निर्देश हैं कि किसी प्रकार के लेने देने की शिकायत न आए। इसके विपरीत अशोक देशमुख द्वारा जिसका पैसा प्राप्त होता है, उनका चेक पहले भुगतान कर दिया जाता है और जो ठेकेदार पैसा नहीं देते है उनका भुगतान महीनों तक नहीं करते हैं। ठेकेदारों ने आग्रह किया है कि लेखाधिकारी अशोक कुमार देशमुख के स्थान पर किसी अन्य अधिकारी की पदस्थापना की जाए, ताकि उनकी समस्याओं का यथोचित हल हो सके। लिखे पत्र के अनुसार देशमुख अपने पुत्र चन्द्र कांत देशमुख को आई.डी.बी.आई. बैंक में सर्विस दिलाने के लिए उस बैंक में खाता खोला गया। पुत्र के प्रमोशन के लिए निगम फंड भी आई.डी.एफ.सी. फर्स्ट बैंक में भेजा जा रहा है। इसकी जानकारी के लिए कैश शाखा से वित्तीय लेनदेन एवं उनकी पुत्र की ज्वाइनिंग आदि की तिथि से परीक्षण किया जा सकता है।
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माह में एक दिन आने वाले सीए को प्रतिमाह डेढ़ लाख
नगर पालिक निगम में चार्टर्ड एकाउण्टेंट (सीए) को प्रतिमाह करीब 1 लाख 50 हजार का भुगतान प्रतिमाह किया जाता है। बताया जा रहा है कि चार्टर्ड एकाउण्टेट का अम्बिकापुर से माह में एक दिन ही कोरबा का दौरा होता है। नस्तियों में साईन उनके कर्मचारियों द्वारा किया जाता है। उक्त राशि से कम खर्च पर कोरबा में सीए मिल सकते हैं, जिसके लिए खुली रूचि की अभिव्यक्ति आमंत्रण करने पर मिल सकते हैं।

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