कोरबा। शहर में इन दिनों आस्था, संस्कार और सकारात्मक ऊर्जा की एक अनुपम लहर बह रही है। दिसंबर से शुरू हुआ राम नाम लेखन महायज्ञ कोरबा के विविध क्षेत्रों में जन-जन को जोड़ते हुए सामाजिक – सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा दे रहा है। 3करोड़33लाख राम नाम लिखने के लक्ष्य के साथ प्रारम्भ हुआ यह अभियान 3?लाख से अधिक परिवारों की सहभागिता सुनिश्चित कर प्रदेश में एकत्रित स्वर में सजे-सजाए आश्रय बन चुका है। महायज्ञ के अंतर्गत विशेष राम नाम लेखन पत्रिका वितरित की गई, जिनका विधिवत पूजन कर प्रत्येक घर-घर में राम नाम लिखे जा रहे हैं। ये पत्रिकाएं न केवल लेखन को प्रेरित करती हैं, बल्कि श्रद्धालुओं को धार्मिक और सामाजिक समरसता के प्रति सजग बनाती हैं प्रत्येक पत्रिका में राम नाम के लिये निर्धारित स्थान, विशेष मंत्र एवं लिखने के नियम स्पष्ट रूप से अंकित हैं, जिससे घर-घर में लिखी गयी सामग्री का मानकीकरण संभव हुआ। समापन समारोह में सामूहिक राम नाम महायज्ञ और राम-खिचड़ी प्रसाद का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु एकत्रित होकर जय श्री राम का उच्चारण करेंगे, जबकि तैयार की गई खिचड़ी को सभी में प्रसाद रूप से वितरित किया जाएगा। यह दृश्य आध्यात्मिक ऊर्जा को सामाजिक समरसता के साथ मिलाते हुए, एक सशक्त संदेश प्रसारित करेगा कि आध्यात्मिक साधना केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामूहिक भी होनी चाहिए। इस महायज्ञ में नन्हें हाथ भी सक्रिय हैं। बच्चों ने कहा कि राम नाम लिखना, राम नाम जप के समान है और यह उनका छोटा-सा योगदान है, ठीक वैसे ही जैसे सेतु निर्माण के समय एक छोटी गिलहरी ने प्रभु श्रीराम के कार्य में अपना योगदान दिया था। बच्चों की इस सहभागिता ने अभियान को भावनात्मक ऊंचाई प्रदान की और संस्कारों की निरंतरता का भरोसा जगाया। एक बच्चे ने बताया कि मैं अपने हाथ से राम नाम लिखकर भगवान को अपना सम्मान दे रहा हूं, यह मेरे लिए एक बड़े कार्य जैसा है।
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आस्था के साथ सहभागिता का जीवंत उदाहरण
लोगों ने कहा कि राम नाम लेखन महायज्ञ केवल लेखन कार्य नहीं, बल्कि एक सामूहिक साधना है जो परिवार, समाज और राष्ट्र को संस्कारों की डोर से जोड़ती है। कोरबा में यह पहल आस्था के साथ-साथ अनुशासन, सहभागिता और सेवा का जीवंत उदाहरण बनकर उभरी है। इस पहल के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संगठनों और आम जनता के बीच सहयोगी भावना मजबूत हुई है, जिससे प्रदेश में शांति, सद्भाव और सांस्कृतिक पुनरुत्थान के बीज गहराई से बोए जा रहे हैं।
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