न्यू फ्रेम वर्क तैयार कर शिक्षा के ढांचे में मूलभूत बदलाव की तैयारी, व्यावसायिक और सामान्य शिक्षा के बीच एकेडमिक समानता का प्रयास

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न्यू फ्रेम वर्क तैयार कर शिक्षा के ढांचे में मूलभूत बदलाव की तैयारी, व्यावसायिक और सामान्य शिक्षा के बीच एकेडमिक समानता का प्रयास

कोरबा। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा न्यू एजुकेशन पालिसी के तहत न्यू फ्रेम वर्क तैयार कर शिक्षा के ढांचे में मूलभूत बदलाव लाने के प्रयास किए गए हैं। इस फ्रेम वर्क के तहत शिक्षा के साथ साथ छात्र-छात्राओं के समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है। जारी किए गए निर्देश में कोर्सेज और उनको पढऩे के लिए समयावधि का भी निर्धारण किया गया है कि एक विषय पर एक शिक्षा स्तर में कम से कम इतने घंटे की क्लास लगनी अनिवार्य होगी। वहीं लैंग्वेज सब्जेक्ट से मिलने वाली रिलीफ को भी खतम करते हुए कम से कम दो विषय पढऩे अनिवार्य किए गए हैं। सीबीएसई ने हर विषय के लिए पढ़ाई के घंटे भी तय कर दिए गए हैं। इसके तहत स्कूलों को तैयारी करने का निर्देश दिया गया है। इसमें लैंग्वेज, एनवायरनमेंट एजुकेशन की 120 घंटे और साइंस और सोशल साइंस की 150 घंटे पढ़ाई होगी। शहर के सीबीएसई के एक स्कूल शिक्षक ने बताया कि पिछले साल से बदलावों की घोषणा की जा रही है। ये बदलाव नई शिक्षा नीति के तहत किए जा रहे हैं, ताकि शिक्षा के स्तर को बढ़ाया जाए। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (आईबीएसई) ने नई शिक्षा नीति के तहत अपने सभी स्कूलों को नेशनल फ्रेमवर्क को लेकर एक निर्देश जारी किए हैं। यह निर्देश कक्षा 9वीं, 10वीं और 11वीं, 12वीं के छात्रों के विषयों को लेकर है। सीबीएसई ने कहा कि कक्षा 9वीं-10वीं में बच्चे दो भारतीय भाषाओं के साथ एक विदेशी भाषा भी पढ़ेंगे। यानी कक्षा 9वीं और 10वीं में बच्चों को अब भाषा के तीन विषयों समेत 10 विषय पढऩे होंगे। वर्तमान में सीबीएसई 10वीं के छात्रों को पांच मुख्य विषय और एक वोकेशनल विषय की पढ़ाई करनी होती है। इस नए फ्रेमवर्क को लागू करने का मुख्य उद्देश्य है कि स्टूडेंट्स में व्यावसायिक और सामान्य शिक्षा के बीच एकेडमिक समानता स्थापित हो सके।

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