पानी से बिजली बनाने की क्षमता बढ़ाने डीपीआर और पर्यावरणीय मंजूरी का इंतजार, बांगो में 1200 मेगावाट का प्लांट स्थापित करने की चल रही है प्रक्रिया
कोरबा।बिजली की मांग के अनुरूप उत्पादन कर छत्तीसगढ़ को सरप्लस राज्य बनाने पानी से बिजली बनाने की क्षमता को बढ़ाने पर फोकस किया है।बिजली का उत्पादन बढ़ाने राज्य शासन 5 बांधों में पंप स्टोरेज तकनीक से हाइडल पॉवर लगाने की योजना बनाई है। इनमें से बांगो बांध पर बिजली उत्पादन कंपनी ने सबसे अधिक फोकस किया है। इसका डीपीआर तैयार कराने के साथ कंपनी की देखरेख में ही नया हाइड्रो पावर प्लांट लगेगी। इसकी क्षमता 1200 मेगावाट की होगी। हसदेव बांगो बांध से 40 किलोमीटर दूर नया हाइड्रो पावर प्लांट लगाने स्थल का चिह्नांकन कर लिया गया है। बिजली उत्पादन कंपनी को पर्यावरण मंजूरी मिलने व डीपीआर तैयार होने का इंतजार है। इसके बाद टेंडर निकालकर आगे की प्रक्रिया को पूरा की जाएगी। पानी से बिजली बनाने की क्षमता बढ़ाने 1200 मेगावाट का प्लांट स्थापित करने की योजना प्रक्रिया में है। अगले 5 साल में बिजली की मांग बढ़कर 10 हजार मेगावाट तक हो जाने का आंकलन है। थर्मल पॉवर प्लांट लगाने पर उत्सर्जित राखड़ के उचित निपटाने की जरूरत होती है। संयंत्र की चिमनियों से निकलने वाली धुएं से पर्यावरण पर असर पड़ता है। इस कारण प्रदेश में इस तरह की परियोजना से सिकासेर जलाशय गरियाबंद में भी 1200 मेगावाट, जशपुर के डोंगरी में 1400 मेगावाट, रौनी में 2100 मेगावाट व बलरामपुर के कोटपट्टी में 1800 मेगावाट का पंप स्टोरेज हाइडल प्लांट लगाने की योजना है।जल विद्युत और पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट की जानकारी ली केन्द्रीय बिजली, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने छत्तीसगढ़ के बिजली परियोजनाओं की समीक्षा की है। उन्होंने जल विद्युत और पंप स्टोरेज परियोजनाओं की अब तक प्रक्रिया कहां तक पहुंची है, इसकी जानकारी ली है। उन्होंने सभी उपभोक्ताओं के लिए विश्वसनीय, गुणवत्तापूर्ण और किफायती बिजली उपलब्ध कराने, विशेष रूप से विशिष्ट कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) घरों के विद्युतीकरण पर जोर दिया। अधिकारियों की मानें तो केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) को बांगो बांध में नया हाइड्रो पावर प्लांट लगाने पर्यावरण मंजूरी के लिए आवेदन किया है। इसका डीपीआर तैयार करा रहे हैं। पर्यावरण मंजूरी मिलने के बाद प्रक्रिया में तेजी आएगी।
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