प्रचार के लिए शासकीय और धार्मिक स्थलों को भी नहीं छोड़ रहे कार्यकर्ता, आदर्श आचार संहिता के पालन में कोताही
कोरबा। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर आचार संहिता तो लागू कर दिया गया है, लेकिन इसके पालन को लेकर अधिकारी गंभीर नहीं है। आदर्श आचार संहिता का पालन करने और कराने के प्रति कई क्षेत्रों में उदासीनता देखी जा रही है। राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता तो अपने प्रचार-प्रसार का काम कर रहे हैं और इस धुन में वे यह भूल जा रहे हैं कि सरकारी संपत्ति पर किसी तरह का प्रचार सामग्री नहीं लगाना है। धार्मिक स्थलों को भी इससे अलग रखना है लेकिन इस तरह की गतिविधियां हो जाने पर रोकथाम के लिए मैदानी अमला फिलहाल नजर नहीं आ रहा है।
आचार संहिता का पालन कराना पूर्ण रूप से प्रशासन तंत्र की जिम्मेदारी है, लेकिन प्रशासन तंत्र का अमला जो संपत्ति विरूपण रोकथाम आदि के कार्य में लगा है, सवाल उठता है कि वह भी इसकी अनदेखी करेगा तो पालन कौन कराएगा। रामपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में इस तरह के नजारे देखने को मिले हैं। सरकारी फोन के टावर की ऊंचाई पर तो बिजली के खंभे पार्टी विशेष के झंडों को थामे हुए हैं। बैनर,तोरण, पोस्टर, झंडे लगाए/लटकाए गए हैं।इतना ही नहीं धर्मस्थल, मंदिर में भी पार्टी का झंडा लगाकर एक तरह से चुनाव प्रचार और वोट की अपील हो रही है। सरकारी संपत्ति में शामिल अटल चौक, पीडीएस की दुकान भवन में भी जमकर प्रचार हो रहा है।इसी प्रकार नगर निगम और शहरी तथा उपनगरीय क्षेत्र में भी अनेक जगहों पर आज भी सही तरीके से संपत्ति विरूपण विरोधी कार्रवाई नहीं हुई है जबकि मतदान के लिए 16 दिन शेष रह गए हैं। ऐसे में संपत्ति विरूपण पर कार्रवाई करने वालों तथा मैदानी अमलों की कार्यशैली पर सवाल उठना लाजिमी है।राजनीतिक दल तो इस शिथिलता का फायदा जमकर उठाएंगे ही लेकिन निर्वाचन आयोग के निर्देशों का पालन करना और कराना भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसकी अनदेखी निष्पक्ष चुनाव पर कहीं ना कहीं सवाल तो उठाएगी ही।
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