फाटक से ट्रेन के गुजरते तक झेलनी पड़ रही धूप की तपिश, रेलवे फाटकों में नहीं है शेड की व्यवस्था

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फाटक से ट्रेन के गुजरते तक झेलनी पड़ रही धूप की तपिश, रेलवे फाटकों में नहीं है शेड की व्यवस्था

कोरबा। जिले का तापमान फरवरी माह के पहले पखवाड़े में ही मार्च और अप्रैल जैसी तेज धूप पड़ रही है। तापमान में 36 डिग्री के पार पहुंच गई है। ऐसे में मार्च और अप्रैल माह में भीषण गर्मी को लेकर चिंतित हैं। इस बीच शहर के चौक-चौराहों में सिग्नल और फाटकों के बंद होने पर इंतजार वाहन चालकों का पसीना छुड़ाने वाला है। इसे लेकर लोग परेशान हैं। शहरी क्षेत्र में चारों तरफ रेल फाटक की समस्या लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। सीएसईबी चौक, ट्रांसपोर्ट नगर, शारदा विहार फाटक, संजय नगर, इमलीडुग्गू, सर्वमंगला नगर, इमलीछापर के साथ दीपका सहित अन्य क्षेत्रों में मुख्य मार्ग पर रेलवे फाटक है। यह स्थिति हर एक से डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर है। एक बार फाटक बंद होने के बाद लोगों को 15 से 20 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है। मार्च-अप्रैल में तापमान में इजाफा होगा। वहीं मई और जून की भीषण गर्मी में फाटक पर इंतजार से लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर के कोयला ढुलाई का लक्ष्य बढऩे के साथ ही कोरबा के लोगों की भी परेशानी बढ़ती जा रही है। धीरे-धीरे रैक संख्या बढ़ रही है। इस रैक को निकालने के लिए 24 घंटे के भीतर रेल फाटक बंद होने की स्थिति बढ़ती जा रही है। यह शहर के विकास की रफ्तार को धीमी कर रही है। लोग समय पर गंतव्य स्थान तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। गर्मी के मौसम में लोगों को पसीना भी छुड़ाने वाली है। रेलवे फाटक बंद होने का समय बढक़र अब 15 से 20 मिनट हो गया है। रेल लाइन से 24 घंटे में तीन से चार लॉगहॉल मालगाडिय़ां दौड़ाई जा रही है। एक ट्रेन को गुजरने में लगभग 10 मिनट का समय लग रहा है। ट्रेन के गुजरने के लगभग पांच मिनट पहले ही फाटक को बंद कर दिया जाता है। मालगाड़ी गुजरने के बाद फाटक पर जाम हो जाती है। इस जाम में वाहन चालक फंस रहे हैं। इस कारण भीषण गर्मी में ऐसी स्थिति में काफी देर तक खड़े होकर इंतजार करना लोगों के लिए भारी पड़ सकती है। सिर्फ गर्मी ही नहीं, बल्कि बारिश के मौसम में भी लोगों को फाटक बंद होने पर भीगते हुए फाटक खुलने का इंतजार करना पड़ता है। इसे लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। बावजूद इसके फाटक वाले स्थानों पर छाया के लिए शेड लगाने को लेकर भी जिम्मेदार विभाग के अफसर गंभीर नहीं है।
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प्रबंधन का ध्यान केवल लदान पर
रेलवे प्रबंधन का सबसे अधिक ध्यान जिले के गेवरा, दीपका, कुसमुंडा, जुनाडीह सहित अन्य साइडिंग से कोयला लदान पर है। लदान की वजह से शहरवासियों को होने वाली परेशानी पर अफसर रुचि नहीं ले रहे हैं। जिला प्रशासन और रेलवे प्रबंधन के समन्वय से संजय नगर नहर रेलवे फाटक पर अंडरपास निर्माण के लिए मंजूरी मिल गई है। लेकिन अभी तक वक्त लगेगा। निर्माण के बाद लोगों को लाभ मिलेेगा। वहीं इमलीडुग्गू रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज को लेकर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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रोजाना निकल रही 40 रैक मालगाड़ी
बताया जा रहा है कि अफसरों पर कोयला ढुलाई का लक्ष्य हासिल करने के लिए दबाव अधिक है। इसके लिए रोजाना लगभग 40 से 42 रैक से अधिक मालगाडिय़ां निकाली जा रही है, जो शहर से लेकर उप नगरीय क्षेत्र के मुख्य मार्ग पर स्थित रेलवे फाटक से होकर गुजरती है।शहर के मुख्य मार्गों पर फाटक है। इसमें भी बीच फाटक पर मालगाडिय़ों को खड़ी कर दी जाती है। यह स्थिति सबसे अधिक शारदा विहार, सर्वमंगला चौक, पावर हाउस रोड, संजय नगर व टीपी नगर रेलवे फाटक पर रहती है। इसकी वजह से सडक़ के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। इसके बाद भी लोगों की समस्या पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

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