Saturday, February 14, 2026

बच्चों को गणित सिखाने शिक्षकों नई खोजा नायाब तरीका, मैथ्स गार्डन का तैयार किया फार्मूला

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बच्चों को गणित सिखाने शिक्षकों नई खोजा नायाब तरीका, मैथ्स गार्डन का तैयार किया फार्मूला

कोरबा। गणित जैसे कठिन विषय को बच्चों में सरलता से समझाने के लिए स्याहीमुड़ी के शिक्षकों ने स्कूल के उद्यान को मैथ्स गार्डन का स्वरूप दिया है। प्रकृति के साथ बच्चे आसानी से गणित सीख सकें इसके लिए क्यारियों को त्रिकोण, आयात व गोलाई की आकृति प्रदान की गई है। रोपे गए पौधों में गणित के सूत्र को लटकाया गया हैं। इससे बच्चे क्यारी का क्षेत्रफल, पौधों की मोटाई आदि माप सकते हैं। गणित के साथ बच्चे पर्यावरण संरक्षण के भी गुर सीख रहे हैं।जिला उद्यानिकी विभाग की ओर से स्कूल के बच्चों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने के लिए उद्यानिकी के योजनाओं से अवगत कराया जा रहा है।प्रारंभिक तौर पर इस योजना के अंतर्गत आत्मानंद स्कूल सिंघिया, हाई स्कूल पताढ़ी, स्याहीमुड़ी, पोड़ी लाफा को चयन किया गया हैं। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत चलाए जा रहे इस योजना का उद्देश्य पर्यावरण के प्रति बच्चों को सजग करना, कृषक श्रेणी में आनेवाले विद्यार्थियों के स्वजन को योजनाओं की जानकारी देना व फलदार पौधों का रकबा बढ़ाना है। सरकार के इस योजना पर नवाचार करते हुए हाई स्कूल स्याहीमुड़ी के शिक्षकों ने स्कूल के उद्यान को मैथ्स गार्डन का स्वरूप दिया है। विद्यालय प्राचार्य फरहाना अली ने बताया कि गणित जैसे विषय से बच्चे अक्सर दूर भागते हैं। बच्चों के लिए यह रूचिकर बने इसके लिए हमने उद्यान में गणित सिखाने का नवाचार किया है।बच्चों को गणित का प्रायोगिक ज्ञान सीखने को मिल रहा है। क्यारियों को अलग-अलग स्वरूप दिया है। जिसकी लंबाई चौड़ाई के आधार पर बच्चे आसानी से उसका क्षेत्रफल निकाल ले रहे हैं।क्यारियों के बीच सड़क की चौड़ाई व दूरी मापने की विधि आसानी से सीख रहे हैं। गणित के विभिन्न आयामों से संबंधित सूत्र को हमने पौधों में लगाया है। रोज उसे देखकर सीखने में बच्चों को आसानी हो रही है। स्कूल में इकोक्लब का गठन किया गया है। जिसका उद्देश्य खेल खेल में पाठ्यक्रम से जुड़े शिक्षा का आसान बनाना है। अली का यह भी कहना हैप्रायोगिक तौर पर शुरूआत की गई इस पहल का बेहतर परिणाम देखने को मिल रहा। गणित जैसे विषय में जिन बच्चों रूचि नहीं थी अब वे आसानी से इस नवाचार के प्रति आकर्षित हो रहे हैं। प्राचार्य अली कहना है कि जिले में पहली बार यह नवाचार की गई है। हमारा प्रयास रहेगा कि इस माध्यम को अन्य स्कूलों में भी शुरू किया जाए ताकि बच्चे आसानी से सीख सकें।

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