Sunday, February 8, 2026

बढ़ी मियाद के 2 दिन में 115 किसानों ने बेचा 8960.8 क्विंटल धान, ढाई लाख क्विंटल धान का नहीं कट सका डीओ

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कोरबा। मुख्यमंत्री की घोषणानुरूप टोकन कट चुके किसानों के धान बेचने की 2 दिवस की बढ़ाई गई मियाद से आकांक्षी जिला कोरबा से 115 किसान लाभान्वित हुए। 5 व 6 फरवरी को अंतिम खरीदी दिवस में 115 किसानों ने 8 हजार 980.8 क्विंटल समर्थन मूल्य पर 212 करोड़ 75 लाख 515 .2 रुपए का धान बेचा। इस तरह जारी अंतिम आंकड़े अनुसार जिले के 41 समितियों के 65 उपार्जन केंद्रों में 43 हजार 861 किसानों ने 27 लाख 47 हजार 101.20 क्विंटल समर्थन मूल्य पर 650 करोड़ 78 लाख 82 हजार 742.80 रुपए का शासन को बेचा। बढ़ाई गई मियाद के बावजूद जिले में कुल पंजीकृत
52 हजार 566 किसानों में से 8 हजार 875 (16.57 फीसदी) किसान उपार्जन केंद्र में धान ही नहीं बेच सके। साथ ही तय लक्ष्य 31.19 लाख क्विंटल की पूर्ति में भी जिला 11 .92 फीसदी दूर रह गया। हालांकि सबसे बड़ी चुनौती उपार्जन केंद्रों में खरीदकर रखे गए 10 लाख 92 हजार 919.20 क्विंटल समर्थन मूल्य पर 251 करोड़ 37 लाख 14 हजार 160 रुपए के धान के उठाव की बनी हुई है। बढ़ती धूप,उठाव की मंद गति ,राइस मिलरों की मनमानी समिति प्रबंधकों की सिरदर्द बढ़ा रही। हालात यही रहे तो समिति को शार्टेज के रूप में लाखों का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा। चालू खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 1 नवंबर से 31 जनवरी तक समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की गई । 2 फरवरी को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में धान खरीदी व्यवस्था से जुड़े अफसरों के द्वारा मुख्यमंत्री के संज्ञान में यह बात लाई गई कि टोकन कटने के उपरांत भी कई किसान धान नहीं बेच सके हैं। जिसे देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 5 एवं 6 फरवरी को 2 दिवस खरीदी की तिथि और बढ़ाने का ऐलान किया, ताकि जिन किसानों का टोकन कट चुका है वे शासन को धान बेच सकें । आकांक्षी जिला कोरबा के 115 किसानों को भी इसका लाभ मिला । 5 व 6 फरवरी को अंतिम खरीदी दिवस में 115 किसानों ने 8 हजार 980.8 क्विंटल समर्थन मूल्य पर 212 करोड़ 75 लाख 515 .2 रुपए का धान बेचा। इस तरह जारी अंतिम आंकड़े अनुसार कोरबा जिले के 41 समितियों के 65 उपार्जन केंद्रों में 43 हजार 861 किसानों ने 27 लाख 47 हजार 101.20 क्विंटल समर्थन मूल्य पर 650 करोड़ 78 लाख 82 हजार 742.80 रुपए का शासन को बेचा। बढ़ाई गई मियाद के बावजूद जिले में कुल पंजीकृत
52 हजार 566 किसानों में से 8 हजार 875 (16.57 फीसदी) किसान उपार्जन केंद्र में धान ही नहीं बेच सके। साथ ही तय लक्ष्य 31.19 लाख क्विंटल की पूर्ति में भी जिला 11 .92 फीसदी दूर रह गया। लक्ष्य की पूर्ति में 3 लाख 71 हजार 898.8 क्विंटल धान की आवक नहीं हो सकी।
250 करोड़ से अधिक का 10.92 लाख क्विंटल धान जाम
जिले में धान खरीदी अभियान संपन्न होने के बाद सबसे बड़ी समस्या जिले के 41 समितियों के 65 उपार्जन केंद्रों में 10 लाख 92 हजार 919.20 क्विंटल समर्थन मूल्य पर 251 करोड़ 37 लाख 14 हजार 160 रुपए का धान जाम पड़ा है। इसमें से ढाई लाख क्विंटल धान का डीओ ही जारी नहीं हुआ है। रेशियो में बदलाव होने के संकेतों के बीच मिलर्स ऑनलाइन डीओ रिक्वेस्ट ही नहीं डाल रहे जिसकी वजह से यह हालात बने हैं ।
इन 5 उपार्जन केंद्रों में 30 हजार क्विंटल से अधिक धान जाम
5 उपार्जन केंद्रों में 30 हजार क्विंटल से अधिक धान जाम हैं। इनमें नवापारा ,बरपाली (कोरबा), बरपाली (बरपाली ), भैसमा एवं सिरमिना शामिल है। इनमें बरपाली (कोरबा)हाथी प्रभावित केंद्र है ,जो जिले के सरहदी वनांचल क्षेत्र स्थित इस केंद्र से धान के उठाव का डीओ ही जारी नहीं हो सका है। मार्कफेड के लचर परिवहन नीति (नजदीकी केंद्रों के धान के उठाव को प्राथमिकता ) की वजह से यह विकट हालात निर्मित हुए हैं ।

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