बारिश इफेक्ट, कोयला उठाव में आई गिरावट, पर्याप्त स्टॉक में कमी से रोड सेल की गाड़ियों को मिल रहा कम कोयला
कोरबा। सरकार की प्राथमिकता बिजली संयंत्रों में कोयले की आपर्ति बनाए रखना है। इसके लिए कोयला कंपनी अन्य उद्योगों को दिए जाने वाले कोयले में कमी कर रही है। हालांकि इस मसले पर कंपनी के अधिकारी अधिकृत तौर पर कुछ बोलने से बच रहे हैं, लेकिन कोयले के उठाव में आ रही कमी से कोल ट्रांसपोर्टर चिंतित हैं। उनका कहना है कि पूर्व में कुसमुंडा खदान से कोयला ले जाने के लिए रोजाना 800 से एक हजार गाड़ियां लाइन में लगती थी। लेकिन वर्तमान में स्टॉक में कोयला उपलब्ध नहीं है। इससे कुसमुंडा स्टॉक में रोड सेल की गाड़ियों को कोयला बहुत कम मिल रहा है। रोजाना 200 से 250 गाड़ियों को ही खदान के भीतर एंट्री मिल रही है।ई-ऑक्शन के जरिए संयंत्रों को दी जाने वाले कोयले में कमी आई है। बहुत दिनों से कोयला कंपनी कोयले के उठाव को लेकर ई-ऑक्शन नहीं कर रही है। पूर्व में जिन उपभोक्ताओं को कोयला उठाव के लिए पत्र जारी किया गया है। कोयला उन्हीं को दिया जा रहा है। एसईसीएल की मानिकपुर खदान से भी रोडसेल की गाड़ियों को पर्याप्त कोयला नहीं मिल रहा है। गेवरा से भी सड़क मार्ग के रास्ते होने वाले कोयला परिवहन में कमी आई है। इससे लोन पर ट्रेलर खरीदने वाले मालिक परेशान हैं। दूसरी ओर वर्षा ऋतु में कोयले का उत्पादन गिर गया है। बारिश का असर खदानों के उत्पादन पर देखा जा रहा है। कंपनी की मेगा प्रोजेक्ट गेवरा और दीपका में इस महीने निगेटिव ग्रोथ दर्ज किया गया है। यह कंपनी के लिए चिंता का कारण है। कुसमुंडा प्रोजेक्टस भी कोयला खनन लक्ष्य के अनुसार नहीं हो रहा है। जुलाई से मानसून सक्रिय हुआ है। अभी 13 दिन ही बीते है कि इसका असर उत्पादन पर दिखने लगा है। चालू वित्तीय वर्ष में अभी तक मेगा प्रोजेक्ट गेवरा को 15.2 मिलीयन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य दिया गया था।गेवरा का स्थानीय प्रबंधन इस लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाया है। 14.6 मिलियन टन अभी तक खनन हुआ है, जो लक्ष्य से 3.83 फीसदी कम है। इस निगेटिव ग्रोथ के कारण कंपनी की चिंता बढ़ गई है। गेवरा के साथ-साथ कुसमुंडा में भी बड़ी गिरावट आई है। कुसमुंडा से कोयला खनन के लिए कंपनी को काफी संघर्ष करना पड़ रहा है। इसका बड़ा कारण बारिश के साथ-साथ जमीन को लेकर भू-विस्थापितों के साथ चल रहा विवाद है।
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