भूविस्थापितों ने टेंडर में मांगा आरक्षण, महाप्रबंधक को लिखा पत्र, अनुमानित लागत से कम दरों पर डाले गए निविदा की हो जांच

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कोरबा। ऊर्जाधानी भू-विस्थापित किसान कल्याण समिति ने एसईसीएल गेवरा क्षेत्र के मुख्य महाप्रबंधक को पत्र सौंपा है। जिसमें कोयला खनन के कारण विस्थापित हुए हजारों किसान परिवारों के लिए वैकल्पिक रोजगार और निविदाओं में उचित भागीदारी की मांग की है। समिति का कहना है कि पैतृक भूमि छिन जाने से किसानों के पास आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। जिसे दूर करना प्रबंधन की नैतिक जिम्मेदारी है। पत्र में कहा गया है कि वर्तमान में विस्थापितों और उनकी सहकारी समितियों के लिए सुरक्षित टेंडर की अनुमानित राशि मात्र 5 लाख रूपए है। समिति ने इसे बढ़ाकर न्यूनतम 20 लाख रूपए करने और वार्षिक टेंडर सीमा को 5 करोड़ रुपए तक करने की मांग की है। वर्ष 2018 के पत्र का हवाला देते हुए समिति ने मांग की है कि कोल ट्रांसपोर्टेशन और अन्य सभी कार्यों के निविदाओं में स्थानीय भू-विस्थापित सहकारी समितियों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण फिर से लागू किया जाए। पत्र में चिंता जताई गई है कि कुछ बाहरी लोग भू-विस्थापितों के प्रमाणपत्रों का दुरुपयोग कर निविदाओं में हिस्सा ले रहे हैं। समिति ने मांग की है कि ऐसे लोगों को ब्लैक लिस्ट किया जाए और केवल वास्तविक परियोजना प्रभावितों को ही प्राथमिकता दी जाए। भू-विस्थापितों को कंपनी के सीएसआर मद से विभागीय कॉलोनियों और कार्यालयों में स्थायी आजीविका व स्वरोजगार के अवसर प्रदान किए जाने की मांग की गई है। समिति अध्यक्ष सपूरन कुलदीप ने कहा कि कुछ टेंडर अनुमानित लागत से 60 से 73 फीसदी नीचे दरों पर डाले जा रहे हैं। इतनी कम राशि में कार्य की गुणवत्ता और विस्थापितों के लाभ पर सवाल उठाते हुए इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है।

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