मकर संक्रांति से खरमास का होगा समापन, शुरू होंगे मांगलिक कार्य, मकर संक्रांति इस साल मनाई जाएगी 15 जनवरी को
कोरबा। मकर संक्रांति का पर्व इस बार 15 जनवरी को मनाया जाएगा। सूर्य 14 जनवरी को अर्धरात्रि 2.44 बजे धनु से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्यास्त के बाद राशि परिवर्तन करने से इस साल मकर संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को रहेगा। इसलिए इस साल मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा।
पंडितों के अनुसार इस वर्ष मकर संक्रांति अश्व पर बैठकर आ रही हैं अर्थात् वाहन अश्व और उपवाहन सिंह होगा। मकर संक्रांति के आगमन के साथ ही एक माह का खरमास भी समाप्त हो जाएगा। इस साल की मकर संक्रांति विद्वान और शिक्षित लोगों के लिए काफी अच्छी रहने वाली है।व्यापारियों और कारोबारी लोगों को वस्तुओं की लागत कम होने से कुछ लाभ होने की संभावना है। हालांकि इस दौरान किसी तरह का भय और चिंता बनी रह सकती है। लोगों को स्वास्थ्य लाभ मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय संबंधों में मधुरता आएगी। अनाज के भंडारण में वृद्धि होगी। पंडितों के अनुसार इस दिन गंगा स्नान और गंगा तट पर दान का भी विशेष महत्व है। इस पर्व को कई समाजों में परंपरा के साथ मनाया जाएगा।ज्योतिषाचार्यों ने बताया कि ज्योतिष गणना के अनुसार इस साल मकर संक्रांति पौष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 15 जनवरी को रवि योग, शतभिषा नक्षत्र में मनाई जाएगी। रवि योग सुबह 7.15 से सुबह 8.07 बजे तक रहेगा। इस दिन भगवान को तिल के लड्डू और खिचड़ी का भोग लगाने का बहुत महत्व है। यदि आप नदी में स्नान नहीं कर सकते तो घर में ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। सूर्य को जल चढ़ाएं।अलग-अलग समाज में अपनी परंपरा के अनुसार मनाएंगे पर्व मकर संक्रांति पर विभिन्न समाजों द्वारा पर्व के साथ पंरपराएं भी निभाई जाएंगी। महाराष्ट्रीयन समाज जहां इस दिन घर-घर हल्दी कुमकुम का आयोजन करेगा। वहीं गुजराती समाज के लोग घरों में पतंग उड़ाकर परंपरा निभाएंगे। इस दिन सुहागिन महिलाओं की ओली भरकर उन्हें उपहार देने की परंपरा है। घर-घर मटकी में सुघड़ा रखकर उसमें अनाज भरकर पांच सुहागिनों को भेंट किया जाता है। शाम को विशेष पूजा की जाती है। इसके अलावा मलयाली समाज इस दिन मकर विलक्कू का पर्व मनाकर अयप्पा स्वामी की पूजा करेगा। संक्रांति 14 जनवरी की अर्धरात्रि में होने की वजह से साल 2019 और 2020 में भी मकर संक्रांति का त्योहार 15 जनवरी को मनाया गया था। 2023 में भी मकर संक्रांति पर्व 15 जनवरी को मनाया गया था। मकर संक्रांति का पर्व 80 से 100 साल में एक दिन आगे बढ़ जाता है। 19वीं शताब्दी में मकर संक्रांति का पर्व 13 और 14 जनवरी को मनाया जाता था। 2080 से 15 जनवरी को ही संक्रांति मनाई जाएगी।
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