कोरबा। नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के पारिवारिक रिश्तेदार, नातेदार को प्रॉक्सी प्रतिनिधि, लायज़न पर्सन की नियुक्ति पर रोक के लिए निर्देश जारी करने के संबंध में समस्त नगर पालिक निगम आयुक्त व समस्त मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पालिका परिषद्/नगर पंचायत को शासन ने पत्र जारी किया है।जिसमें पुन: अवगत कराया गया है कि नगरीय प्रशासन विभाग के पत्र दिनांक 20.08.2010 द्वारा राज्य के समस्त नगरीय निकायों को कार्यों के संचालन में महिला जनप्रतिनिधियों के पारिवारिक रिश्तेदार, नातेदार के द्वारा कामकाज के संचालन के दौरान बैठक आदि में भाग नहीं लेने और न ही हस्तक्षेप करने के संबंध में निर्णय लेकर सूचित किया गया है। छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 9 एवं छ.ग. नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 19 के अनुसार सांसद/विधायकगणों द्वारा नगरीय निकायों में अपने प्रतिनिधि नियुक्त किया जाता है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा प्रदेश के नगरीय निकायों में सांसद एवं विधायकगणों के द्वारा निर्वाचित महिला जनप्रतिधिनियों के पारिवारिक रिश्तेदार, नातेदार को प्राक्सी प्रतिनिधि, लायज़न पर्सन नियुक्त किये जाने पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, अनुच्छेद 15(3) व अनुच्छेद 21 का उल्लंघन माना है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा उक्त के उल्लंघन के फलस्वरूप भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 207, 223 व 316 एवं मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 13 के अंतर्गत कार्यवाही का भी उल्लेख किया गया है। विभाग के संज्ञान में लाया गया है कि कतिपय नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के पारिवारिक रिश्तेदार, नातेदार को प्राक्सी प्रतिनिधि, लायज़न पर्सन नियुक्त किया जा रहा है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देश एवं भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, अनुच्छेद 15(3) व अनुच्छेद 21 का उल्लंघन होने के कारण समस्त नगरीय निकायों के आयुक्त/मुख्य नगर पालिका अधिकारी को निर्देशित किया गया है कि शीघ्र अपने-अपने निकायों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के पारिवारिक रिश्तेदार, नातेदार जो नामांकित जनप्रतिनिधि हैं, के संबंध में परीक्षण कर सांसद/विधायकगणों से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देशों के पालन के अवगत कराने एवं अन्य नामांकित जनप्रतिनिधियों की नियुक्ति के लिए आवश्यक कार्यवाही करने कहा गया है।
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वर्ष 2010 में जारी हो चुका है आदेश
इसके पूर्व में दिनांक 20 अगस्त 2010 को नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा समस्त आयुक्त नगर पालिक निगम एवं समस्त मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पालिका परिषद्/नगर पंचायत को जारी पत्र में कहा गया था कि- शासन के संज्ञान में यह बात लाई गई है कि नगरीय निकायों के कार्यों में निर्वाचित महिला पदाधिकारियों के संबंधियों द्वारा अनावश्यक हस्तक्षेप किया जाता है। नगरीय निकायों के कामकाज संचालन के दौरान बैठक आदि में महिला पदाधिकारी के कोई भी संबंधी, रिश्तेदार भाग नहीं लेंगे और न ही हस्तक्षेप व दखलंदाजी करेंगे और न ही किसी विषय पर किसी भी पदाधिकारी, कर्मियों को महिला पदाधिकारी की ओर से निर्णय लेकर सूचित करेंगे या निर्देश देंगे। उक्त निर्देशों को समस्त महिला पदाधिकारियों के ध्यान में लाया जाए। यदि इसका उल्लंघन हो तो संबंधित के विरूद्ध नगर पालिक निगम व नगर पालिका अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत कार्यवाही प्रस्तावित करें।
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