Saturday, January 24, 2026

माइंस विस्तार से प्रभावित गांवों के विस्थापन की तैयारी, खदानों से बढ़ाया जाएगा कोयला उत्पादन

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कोरबा। कोल इंडिया के सालाना डेढ़ बिलियन टन कोयला उत्पादन के लिए एसईसीएल की नई खदानें खुलेंगी। वहीं पुरानी खदानों की माइंस विस्तार से कोयला उत्पादन क्षमता को बढ़ाएंगे। कोरबा में माइंस विस्तार से प्रभावित गांवों के विस्थापन की तैयारी में एसईसीएल जुट गई है। जिन गांवों के अधिग्रहण के बाद रोजगार, मुआवजा भुगतान की कार्रवाई शुरू कर दी है, वहां के ग्रामीणों को चिन्हित बसाहट स्थल में बसाने की तैयारी है। साल 2026 में विस्थापन की प्रक्रिया में तेजी आएगी। बिजली उत्पादन का 70 फीसदी से ज्यादा हिस्सा कोयला से होता है। पावर प्लांटों की कोयला जरूरतें पूरी करने एसईसीएल ने योजना बनाई है, जो कोल इंडिया के साल 2030 तक डेढ़ बिलियन टन कोयला उत्पादन का हिस्सा है। पिछले साल कोल इंडिया ने वन बिलियन टन उत्पादन का आंकड़ा छूने के बाद अगले 4 साल में डेढ़ बिलियन टन सालाना कोयला उत्पादन का लक्ष्य रखा हुआ है। कोयला खनन से पर्यावरण को नुकसान होता है। इसलिए एसईसीएल ने भूमि सुधार, पौधारोपण व जल संरक्षण की योजना बनाई है। क्योंकि माइंस विस्तार से जमीन अधिग्रहण कर खनन कार्य किया जाएगा। जिले में एसईसीएल की मेगा प्रोजेक्ट गेवरा, कुसमुंडा व दीपका माइंस का भी विस्तार होगा। जमीन अधिग्रहित गांवों के लिए चयनित बसाहट स्थल पर बसाने खाली कराया जाएगा। खदान विस्तार से नए कोल फेस खुलने पर कोयला उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जाएगा। चूंकि खदान के विस्तार से खदान का दायरा अभी से अधिक बढ़ेगा, इसलिए ड्रोन से निगरानी, स्वचालित मशीनों का उपयोग और खदानों में डिजिटल मैनेजमेंट सिस्टम लागू किए जाएंगे। जिले में एसईसीएल की नई कोयला खदानें भी खुलेंगी। इनमें पाली ब्लॉक में स्थित अंबिका ओपनकास्ट माइंस से मिट्टी हटाने का काम शुरू हो गया है, जो कोरबा एरिया में है। इसी क्षेत्र में करतली ईस्ट परियोजना के नाम से नई खदानें खोली जाएगी। अघोषित रूप से बंद भूमिगत खदानों में कंटीन्यूअस माइनर मशीन लगाकर पुन: संचालन की भी तैयारी है। इसी के तहत आगामी वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभिन्न खदानों के लिए अतिरिक्त 8 कंटीन्यूअस माइनर चालू करने का प्रस्ताव एसईसीएल ने बनाया है। सुराकछार मेन माइंस में रिजर्व कोयले को निकालने कंटीन्यूअस माइनर मशीन उतारा जाएगा। सबसे अधिक कोयले की आपूर्ति एसईसीएल बिजली संयंत्रों को कर रही है। कुल उत्पादन का लगभग 75 फीसदी हिस्सा पावर प्लांटों को सप्लाई की जाती है। व्यवसायिक खनन से भविष्य में एसईसीएल की कोयले की मांग घटने की संभावना पर दूसरे क्षेत्रों में उपयोग पर भी कार्ययोजना बनाकर काम शुरू कर दिया है। बता दें कि नवीकरणीय ऊर्जा से बिजली बनाने के विकल्प पर काम जरूर किया जा रहा है। लेकिन अगले कई साल तक ऊर्जा का प्रमुख स्त्रोत कोयला बना रहेगा। हालांकि सूरज की रौशनी व पानी से बिजली बनाने का प्लांट जरूर लगाए जा रहे हैं। इस दिशा में कोल इंडिया का प्रयास कोयला कंपनी को ऊर्जा कंपनी बनाने का है। एसईसीएल ने छत्तीसगढ़ के संचालन क्षेत्र में 40 मेगावाट से अधिक की सोलर प्रोजेक्ट की शुरूआत कर चुकी है।

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