कोरबा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ एक डॉक्टर की संवेदनहीनता उस वक्त सामने आई, जब सांस लेने की तकलीफ होने पर बुजुर्ग महिला को लेकर परिजन इलाज के लिए पहुंचे। उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। डॉक्टर ने उसे मृत घोषित करने से ही इंकार कर दिया। परिजन व संजीवनी कर्मियों के बार बार कहने के बाद भी डॉक्टर ने शव को मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया, जहां से देर रात मुक्तांजलि एक्सप्रेस की मदद से मृत महिला को घर लाया गया इस दौरान कड़कती ठंड के बीच परिजन हलाकान होते रहे। जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर उरगा में राधा देवी 70 वर्ष निवास करती थी। संयुक्त परिवार होने के कारण दोनों बेटे के अलावा अन्य सदस्य भी बुजुर्ग महिला का ख्याल रखते आ रहे थे। बुधवार की रात अचानक राधा देवी की तबीयत बिगड़ गई। उसे सांस लेने में तकलीफ होने लगी। परिजन रात करीब 8.15 बजे उसे लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पताढी पहुंचे, जहां महिला स्वास्थ्य कर्मी तैनात थी। उसने वृद्धा की हालत से तत्काल महिला चिकित्सक को अवगत कराया। थोड़ी देर बाद महिला चिकित्सक भी अस्पताल पहुंची। उन्होंने बुजुर्ग महिला का उपचार शुरू कर दिया। करीब एक घंटे तक चले इलाज के बाद वृद्धा की सांसें थम गई। इसकी जानकारी किसी तरह परिजनों को लग गई। वे कुछ समझ पाते, इससे पहले रायपुर स्थित कंट्रोल रूम से इवेंट मिलने पर सरगबुंदिया लोकेशन में तैनात ईएमटी रमेश पायलट के साथ अस्पताल जा पहुंचा। किसी तरह परिजन और संजीवनी एक्सप्रेस की टीम को वृद्धा के मृत हो जाने की भनक लग गई। उन्होंने मृतिका के शव को रेफर करने के बजाय मृत घोषित कर देने की बात कहीं, लेकिन डॉक्टर ने साफतौर से इंकार कर दिया। उन्होंने दस्तावेजी कामकाज जिला अस्पताल में होने की बात कहीं। इसके साथ ही मृतिका के शव को ही मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया। संजीवनी कर्मी रात करीब दस बजे मृतिका को लेकर मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे, जहां उसे अधिकृत तौर पर मृत घोषित किया गया। इसके साथ ही मुक्तांजलि एक्सप्रेस की मदद से शव को घर रवाना किया गया। डॉक्टर की संवेदनहीनता के कारण परिजन पूरी रात कड़कते ठंड के बीच हलाकान होते रहे। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग में व्यवस्था की पोल खोल दी है।
![]()

