मौसम नहीं खुला तो फिर ठंड ने दिखाए अपने तेवर, बारिश के आसार, लोगों का जनजीवन हो रहा प्रभावित
कोरबा। मौसम का मिजाज फिर बदल गया है। जिले में दिनभर बदल छाए रहे। सुबह शहर कोहरे के आगोश में रहा। ठंडी हवा चलती रही। न्यूनतम तापमान में गिरावट आ गई है। इस कारण कोरबा में ठिठुरन बढ़ गई है। जिले में सर्द हवाएं लोगों को काफी परेशान कर रही है।
अब रात में कड़ाके की पड़ रही है। सुबह शहरी क्षेत्र के नदी, नहर, तालाब, नाला सहित कई इलाके में कोहरा छाया रहा। सुबह से देर रात तक सर्द हवाएं चली। बदली के बीच बारिश की स्थिति बनी रही। बदली की वजह से लोगों को धूप का अहसास कम हुआ। ठंड से राहत नहीं मिली। कुछ समय बाद सूर्य बदली के बीच छिप गई। दिनभर ठंडी हवाएं चली। इस कारण मौसम विभाग ने तापमान में भारी गिरावट दर्ज की है। कुछ मिनटों के लिए निकली धूप के कारण अधिकतम तापमान में दो डिग्री दर्ज किया गया, लेकिन सर्द हवा की वजह से लोगों ठिठुरते रहे। दोपहर लगभग दो बजे के बाद मौसम ने करवट ली। तापमान में लगातार गिरावट बच्चे, बुजुर्ग व महिलाओं को काफी परेशान कर रही है। ऐसे में लोग ठंड की वजह से जरूरी कार्य होने पर बाहर निकल रहे हैं। काम पूरा होने के बाद घर पर दुबके हुए हैं। अलाव का सहारा ले रहे हैं।
सर्द हवा और कोहरे की वजह से रात में चालकों को गाड़ी चलाने में काफी असुविधा हो रही है। नदी, नहर, तालाब, नाला सहित कई इलाके में कोहरे की वजह से मुख्य मार्गो की विजिबिलिटी कम हो रही है। सौ से डेढ़ सौ मीटर की दूरी पर चल रही गाडिय़ां कई बार चालकों के नजर नहीं पड़ रही है। इससे दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।
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ठंडी में भी गर्मी जैसी बिजली की डिमांड
खराब मौसम में भी बिजली की मांग में कमी नहीं आ रही है। प्रदेश की ऊर्जा जरूरतों को पूरी करने के लिए साढ़े चार हजार मेगावाट से अधिक की बिजली की जरूरत पड़ रही है। यह स्थिति तब है जब प्रदेश में अधिकतम तापमान 20 डिग्री और न्यूनतम 14 डिग्री के आसपास है। इस मौसम में ठंड बढऩे से बिजली की खपत कम होती है। इससे बिजली उत्पादन करने वाली इकाईयों को कम लोड पर चलाया जाता है लेकिन वर्तमान में छत्तीसगढ़ में बिजली की जरूरत गर्मी के दिनों जैसी हो रही है। शुक्रवार को प्रदेश में बिजली की मांग 4700 मेगावाट के आसपास दर्ज की गई। इसे पूरा करने के लिए प्रदेश सरकार ने सेंट्रल बोर्ड से 2000 मेगावाट से अधिक बिजली लेनी पड़ रही है। कोरबा और जांजगीर-चांपा जिले में स्थित बिजली उत्पादन संयंत्र से पूरी क्षमता के अनुसार बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। हालांकि मड़वा की एक ईकाई चालू नहीं है।इसके बाद भी घरेलू जरूरतें 2100 मेगावाट के आसपास ही पूरी हो रही है। शेष बिजली के लिए प्रदेश सरकार को सेंट्रल पोल से बिजली लेनी पड़ रही है। इससे प्रदेश सरकार के खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। इस बीच मड़वा की दूसरी इकाई उत्पादन से बाहर हो गई है इससे कंपनी को 500 मेगावाट उत्पादन का नुकसान हो रहा है।
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