कोरबा। पांच साल पुराने राजस्व रिकार्ड में जालसाजी और धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में पुलिस की जांच अब तक पूरी नहीं हो सकी है। इस मामले में पीड़िता के बेटे की याचिका पर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कोरबा के एसपी को व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र के साथ जवाब देने के निर्देश दिए हैं। एसपी यह बताने का निर्देश दिया है कि मजिस्ट्रेट के आदेश के बावजूद अब तक जांच पूरी क्यों नहीं की गई। अगली सुनवाई 11 फरवरी को होगी। कोरबा निवासी अंकित सिंह ने हाई कोर्ट में पिटीशनर इन पर्सन केस प्रस्तुत किया है, इसमें बताया कि उनकी मां अरुणिमा सिंह ने जालसाजी और धोखाधड़ी के मामे में 22 दिसंबर 2020 को अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ धारा 420, 465, 467, 468 और 471 के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले की जांच के बाद कोरबा के जेएमएफसी कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट पेश की थी। कोर्ट ने तथ्यों, याचिकाकर्ता और उनकी मां के बयानों के आधार पर 10 नवंबर 2025 को पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया था। मजिस्ट्रेट ने पुलिस को मामले की दोबारा जांच करने के आदेश दिए थे। मामले पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि वर्ष 2020 का मामला होने और मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद भी जांच अब तक लंबित है। हाई कोर्ट ने कोरबा के एसपी को शपथ पत्र के साथ कारण बताने को कहा है कि जांच पूरी क्यों नहीं हो सकी है। इसके अलावा देरी के लिए जिम्मेदार जांच अधिकारी की जिम्मेदारी तय करें।
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