रौद्र नाम का होगा नया संवत्सर, गुरु राजा, मंत्री मंगल, चंद्र संभालेंगे गृह

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कोरबा।19 मार्च से विक्रम संवत 2083, धार्मिक गतिविधियां बढ़ेंगी, कृषि क्षेत्र में संतुलन रहेगा, नया संवत्सर उग्र
कोरबा। हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 की शुरुआत 19 मार्च से होगी। साल बदलते हुए ब्रह्मांडीय मंत्रिमंडल में परिवर्तन होगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार नया संवत्सर का नाम रौद्र होगा। इसके राजा देवगुरु बृहस्पति और मंत्री मंगल होंगे। चंद्रमा को मेघेश, फलेश और दुर्गेश यानी रक्षा और गृह विभाग का दायित्व मिलेगा।ज्योतिषाचार्यों ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार रौद्र संवत्सर को उग्र, परिवर्तनशील और तीव्र प्रभाव देने वाला माना जाता है। वर्षभर प्राकृतिक घटनाओं में असंतुलन की स्थिति बन सकती है। कहीं अत्यधिक तो कहीं अल्प वर्षा, भूकंप और आंधी-तूफान जैसी घटनाएं संभावित हैं। वातावरण में उष्णता बनी रह सकती है। हालांकि राजा बृहस्पति होने से प्रभावों की तीव्रता सीमित रहेगी और सामाजिक संतुलन बना रहेगा। धार्मिक आस्था, पूजा-पाठ और आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि के योग हैं। मंत्री मंगल होने से अपराध और रोगों में वृद्धि संभव है, लेकिन स्थिति नियंत्रण में रहेगी। बृहस्पति के प्रभाव से कृषि, दुग्ध उत्पाद और खाद्यान्न उत्पादन बेहतर रहने के योग हैं। ग्रहों के विभागों के प्रभाव से उत्पादन बढ़ेगा ज्योतिषीय मान्यताओं के य मान्यताओं के अनुसार बुध के कारण उत्पादन बढ़ेगा, हालांकि कुछ क्षेत्रों में महंगाई देखी जा सकती है। मेघेश चंद्रमा समुचित वर्षा का संकेत देता है। शनि के प्रभाव से खनिज उत्पादन में कमी और कीमतों में वृद्धि संभव है, जबकि बृहस्पति के कारण सोना-चांदी जैसी धातुओं में उतार-चढ़ाव के बाद मंदी की स्थिति बन सकती है। फलेश और धनेश चंद्रमा होने से फसल और राजकोष में वृद्धि के योग हैं। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि नए संवत्सर के ग्रह गोचरों से इसका प्रभाव कृषि क्षेत्र में मिलाजुला रह सकता है।

रौद्र संवत्सर 2083 का ज्योतिषीय मंत्रिमंडल
राजा: बृहस्पति, मंत्री: मंगल, शास्येश (कृषि): बृहस्पति, धान्येश (खाद्य): बुध, मेघेश (जल): चंद्र, राशेश (प्रवाहशील द्रव्य): शनि, नीरशेश (खनिज पदार्थ): बृहस्पति, फलेश (वन एवं पर्यावरण) : चंद्र, धनेश (वित्त): गुरु, दुर्गेश (गृह और रक्षा) : चंद्र

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