वर्ष 2030 तक 1577 एमटी कोयला उत्पादन करने की योजना, बिजली की मांग पूरा करने बढ़ाना होगा कोयला उत्पादन, पावर प्लांटों में बढ़ रही है कोयले की खपत
कोरबा। बिजली की घरेलू मांग को पूरा करने के लिए देशभर के प्लांटों में कोयले की खपत बढ़ रही है। यह कोयला उद्योग के लिए अवसर है। इसका आंकलन करते हुए कोयला मंत्रालय ने वर्ष 2027 तक 1404 मिलियन टन (एमटी) और वर्ष 2030 तक 1577 एमटी कोयला उत्पादन करने की योजना बनाई है।
वर्तमान में कोयले का उत्पादन स्तर लगभग एक बिलियन टन प्रति वर्ष है। इसमें कोल इंडिया की सहयोगी कंपनी एसईसीएल का योगदान लगभग 160 मिलियन टन का है। हालांकि आने वाले वर्षों एसईसीएल का योगदान बढऩे वाला है। इसमें कोरबा जिले में स्थित एसईसीएल की मेगा प्रोजेक्ट गेवरा, दीपका और कुसमुंडा अहम होगी। आने वाले चार साल में सभी मेगा प्रोजेक्ट का विस्तार होगा। कोयला खनन और परिवहन में तेजी आएगी। इसपर कोल इंडिया तेजी से आगे बढ़ रही है। एक रिपोर्ट में बताया गया कि कोयला मंत्रालय ने 2030 तक देश में जोड़ी जाने वाली अतिरिक्त 80 गीगावॉट थर्मल क्षमता की आपूर्ति के लिए अतिरिक्त कोयले की जरुरत होगी। इस क्षमता के लिए कोयले की आवश्यकता 85 प्रतिशत पीएलएफ पर लगभग 400 मीट्रिक टन होगी। कोयला मंत्रालय की उत्पादन वृद्धि योजना में अतिरिक्त मात्रा में कोयले का उत्पादन करने की योजना है और यह ताप विद्युत संयंत्रों को घरेलू कोयले की आपूर्ति करने की है।
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खदानों का विस्तार और नई खोलने की योजना
उत्पादन बढ़ाने के लिए कोल इंडिया ने अपनी खदानों का विस्तार और नई खदान खोलने की योजना बनाई है। अलवा कैप्टिव व वाणिज्यिक खनन से उत्पादन बढ़ाने की योजना है। रिपोर्ट में यह भी बताया कि वर्ष 2027 और 2030 के लिए कोल मंत्रालय बिजली संयत्रों की मांग से अधिक कोयला उत्पादन करेगी।
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कोलफील्ड्स के पास कार्यशील रेल लाइन बेहद कम
रिपोर्ट के अनुसार बिजली के कुल उत्पादन में कोयले का योगदान 76.59 फीसदी है। भविष्य में कोयले की मांग बनी रहेगी। 2031- 32 तक जब देश में बिजली मांग 24 लाख 73 हजार 776 मिलियन यूनिट होगी। उस समय देश में कोयले की मांग लगभग 1900 मिलियन टन होगी। इसके लिए कोल मंत्रालय ने अभी से तैयारी शुरू की है। वर्तमान में कोलफील्ड्स के पास कार्यशील रेल लाइन बेहद कम है। 10 साल बाद की जरुरत को देखते हुए आज से पांच साल पहले छत्तीसगढ़, झारखंड, एमपी, ओडिशा में कुल 15 नई रेललाइन बिछाने का काम शुरु हुआ था। इन 15 रेललाइन में चार लाइन ही पूरी हो चुकी है। छत्तीसगढ़ में तीन लाइन पर काम चल रहा है। गेवरारोड से पेंड्रारोड तक रेललाइन का काम अभी आधा हो सका है।
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