विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में आयोजित
कोरबा। कस्तुरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी रामपुर कोरबा में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा के द्वारा छात्रों को विधिक जानकारी दिये जाने के प्रयोजनार्थ विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया, मुख्य अतिथि सत्येन्द्र कुमार साहू, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा के द्वारा अपने उद्बोधन में कहा गया कि हमारे देश का कानून संसद एवं विधानसभा के द्वारा बनाया जाता है, यहॉं चुनाव के माध्यम से नेता चुनकर आते है। यह सिस्टम पहले के सिस्टम से बहुत अच्छा है। आज गरीब का बच्चा भी अच्छे पढ़कर बड़े -बड़े पोस्ट पर पहुंच सकता है, हमारे राष्ट्रपति महामहीम माननीय द्रोपदी मुनमुन है, क्या पहले का सिस्टम होता तो वह राष्ट्रपति बन सकती थी। पहले राजतंत्र था वहॉं राजा का बेटा राजा एवं राजा के बेटी हुई तो महारानी बनती थी। हमारे देश में यहॉं कानून का शासन चलता है, सभी व्यक्ति नियम से बंधे हुये है सभी को नियमों का पालन करना आवश्यक है, जो नियम को तोड़ता है उसे दण्ड दिया जाता है। राजपत्र में कोई भी कानून प्रकाशित होने पर हम नहीं कह सकते हैं कि साहब हमें इस कानून का जानकारी नहीं था। कानून जन्म लेने से लेकर मृत्यु तक लागू रहता है, हमारे यहॉं आने का उद्देश्य यही है कि आप लोगों के बीच जाकर हम आपको कानूनी शिक्षा दें। आप सभी छात्रों को सुझाव देते हुये कहॉं गया कि नियम कानून का पालन करते हुये शिक्षा का अवसर का लाभ उठाकर अपने भविष्य को संवार सकते है। वही नाबालिक बच्चे उत्सुकता वश कभी कभी गाड़ी चला लेते है, लेकिन यह उचित नहीं है। गाड़ी चलाने के पहले लायसेंस रखना अनिवार्य है। यह मोटर अधिनियम में एक्ट है। गाड़ी चलाते समय हमेशा वैध लाईसेंस रखें वैध लाईसेंस नहीं होने पर कोई भी दुर्घटना घटित होती है, जो नाबालिक गाडी चला रहा था, उसके रिश्तेदार जो वाहन मालिक है। उनको दण्ड के साथ जुर्माना या क्षतिपूर्ति बहुत भारी देना पड़ सकता है। आप सभी बच्चे है महिला हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है, लेकिन आप आगे पढ़ाई करने जायेगी तो कभी भी अपनी स्वतंत्रता का दुरूपयोग मत करों, हमें हमेशा अपने नैतिक कर्तव्यों का पालन करना होगा। वही श्रीमती गरिमा शर्मा के द्वारा अपने उद्बोधन में कहा गया कि आज आपके बीच जिले के सबसे बड़े जज प्रधान न्यायाधीश आये है, उनका आपके बीच आने का उद्देश्य यह है कि बच्चे को कानून से जुड़े छोटे-छोट नियमों का ज्ञान हो, कानून की जानकारी विद्यालयों में नहीं पढ़ाई जाती है इसके लिये अलग से पड़़ने की आवश्यकता होती है। विधि के तथ्य की जानकारी न हो तो क्षम्य है, लेकिन काूननी रूप से गलत काम करते है तो वह क्षम्य नहीं है। यदि कोई काननू बना है तो उसका पालन सभी व्यक्तियों को करना होगा। आप सभी को इसका पालन करना आवश्यक है। आपके विद्यालय में भी हॉस्टल के नियम चलते है, आपको लगेगा कि हमंें स्वतंत्रता की आजादी नहीं है, यही अनुशासन आपको आगे लेकर जाकर उच्चे पद पर सुशोभित करंेगे तब आपको समझ में आयेगा कि कानून व्यवस्था का पालन करना कितना आवश्यक था। हॉस्टल में रहते हुये या मार्केट जाते हुये किसी छात्रा के साथ छेड़-छाड़ हो जाये तो उसे अपने अधीक्षिका,शिक्षक को अवश्य बताये, इसे बिल्कुल न छुपाये। आपके शिकायत करने से उसको सजा मिलेगी तथा वे भविष्य में कोई अन्य अपराध करने से बचेगा। आप आगे चलकर किसी घर के जिम्मेदारी लेगें तो थोड़ा बहुत घर की महिलायें एवं पुरूषों के बातों को सहने की कोशिश करें छोटे-मोटे आपसी पारिवारिक विवाद में पुलिस में शिकायत न करें। लेकिन सहन शीलता तभी तक होगी जब तक कि आपके आत्म सम्मान की बात न आयें। आपको किसी भी प्रकार की विधिक सहायता की आवश्यकता हो तो प्रत्येक जिले में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का कार्यालय होता है, आप उक्त कार्यालय में जाकर निःशुल्क विधिक सहायता ले सकते है, आपको इसमें किसी भी प्रकार की वकील को पैंसे देने की आवश्यकता नहीं होगी। वही उक्त अवसर हॉस्टल वार्डन निशा पाटिल सोनारे, अतिथि शिक्षक करिश्मा बेक, असलेखा सिंह, विक्टोरिया टिर्की, पीएलव्ही वंदना चन्द्रोसा, गोपाल चन्द्रा, कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय परिसर कोरबा के समस्त कार्यालयीन कर्मचारीगण उपस्थित थे।
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