कोरबा। जरहाजेल के कई विस्थापितों को अधिग्रहित जमीन के बदले रोजगार और मुआवजा नहीं मिला है। इनके प्रकरण एसईसीएल में लंबित हैं। यह आरोप शुक्रवार को कलेक्टोरेट पहुंचे ग्रामीणों ने लगाया। नराईबोध को बसाने के निर्णय पर भू-स्वामियों को वापस करने की मांग उठाई। इसका ज्ञापन भी कलेक्टोरेट कार्यालय में सौंपा। एसईसीएल गेवरा खदान विस्तार से प्रभावित नराईबोध के ग्रामीणों को विस्थापित कर जरहाजेल की पूर्व में अधिग्रहित जमीन पर बसाहट का प्रबंधन ने निर्णय लिया है। जमीन समतलीकरण कार्य की तैयारी भी शुरू कर दी है। कार्य में किसी तरह का व्यवधान ना हो, इसके लिए कैंप लगाकर पुलिस की ड्यूटी लगाई गई है। इस बीच कलेक्टोरेट पहुंचे ग्रामीणों ने जरहाजेल के विस्थापितों के लंबित रोजगार व मुआवजे के प्रकरण के निराकरण की मांग की है। अन्यथा जमीन वापसी की मांग की है। ज्ञापन देने पहुंचे प्रतिनिधि मंडल में शामिल दामोदर श्याम, इंद्र प्रकाश, घासीराम कैवर्त ने बताया कि एसईसीएल की जरहाजेल में चयनित बसाहट स्थल की अधिग्रहित जमीन का साल 1983 में पारित अवार्ड में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि 20 साल तक जमीन का उपयोग नहीं करने पर मूल खातेदारों को जमीन वापसी करने की शर्त है। आदेश पत्र में निहित शतों में अपने परियोजना के तहत अन्य गांवों को बसाहट दिए जाने का प्रावधान नहीं था। अगर जमीन के उपयोग की जरूरत पड़ी है तो प्रबंधन को अवार्ड में दिए गए प्रावधान के अनुसार राज्य सरकार की नीति का पालन कर किसानों के पुन: अर्जन की कार्रवाई करनी थी। इस मौके पर दीपक साहू, फीरत, हरिशरण, राकेश, लक्ष्मण, वीरेंद्र, सुमेंद्र, बृहस्पति, दीनानाथ उपस्थित थे।
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