Saturday, January 24, 2026

वेदांता लिमिटेड पर बीआरएसआर में फर्जीवाड़ा, मानवाधिकार दमन एवं ईएसजी धोखाधड़ी के गंभीर आरोप, जयसिंह अग्रवाल ने की सेबी से फॉरेंसिक जांच एवं कठोरतम कार्रवाई की मांग

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कोरबा। वेदांता लिमिटेड पर अपने अनिवार्य बिजनेस रिस्पांसिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट (बीआरएसआर) वित्त वर्ष 2024-25 में मानवाधिकार उल्लंघन, भ्रष्टाचार मामलों के दमन एवं भ्रामक ईएसजी खुलासों के माध्यम से निवेशकों, नियामकों और सरकार को गुमराह किए जाने का एक अत्यंत गंभीर आरोप लगाया गया है। पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने आरोप लगाते हुए इस संबंध में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को औपचारिक शिकायत प्रस्तुत करते हुए फॉरेंसिक जांच और दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। बीआरएसआर में सुनियोजित झूठ और धोखाधड़ी शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वेदांता लिमिटेड ने सेबी रेगुलेशंस, 2015 के अंतर्गत अनिवार्य बीआरएसआर में जानबूझकर झूठे, भ्रामक और तथ्यहीन प्रकटीकरण किए हैं, जो सीधे तौर पर मेटेरियल मिस्ट्रप्रेजेंटेशन की श्रेणी में आते हैं।केवल कागज़ों में वेदांता ने बीआरएसआर में यह दावा किया कि कर्मचारियों व श्रमिकों के लिए प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था मौजूद है और इसके लिए पोर्टल सक्रिय है। जबकि वास्तविकता यह है कि इसी पोर्टल पर 171 शिकायतें दर्ज की गई। शिकायतें कार्यस्थल पर भेदभाव, जबरन श्रम एवं प्रतिशोधात्मक कार्रवाई से संबंधित थीं। किसी भी शिकायत पर न जवाब मिला, न निवारण। बाद में पूरा पोर्टल ही बंद/ब्लॉक कर दिया गया। इसके बावजूद बीआरएसआर में उसी पोर्टल को “सक्रिय व्यवस्था” बताना सीधा-सीधा धोखाधड़ीपूर्ण प्रकटीकरण है। श्री अग्रवाल का आरोप है कि भ्रष्टाचार मामलों को छिपाया गया वेदांता ने बीआरएसआर में यह घोषित किया कि कंपनी या उसकी सहायक इकाइयों में किसी कर्मचारी/श्रमिक के विरुद्ध भ्रष्टाचार या रिश्वत के मामलों में कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबकि तथ्य यह हैं कि वेदांता की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी बालको के स्थायी कर्मचारियों के विरुद्ध आईपीसी 420, 468, 471, 120-बी जैसी गंभीर धाराओं में तीन एफआईआर दर्ज हैं।आरोपी कर्मचारी महीनों तक फरार रहे। प्रबंधन ने पुलिस को भ्रामक जानकारी दी। कोई विभागीय कार्रवाई नहीं हुई जमानत के बाद आरोपियों को पूरा वेतन, बोनस और पीएफ लाभ दिए गए। मामलों को “नील” दिखाना जानबूझकर किया गया भ्रष्टाचार का दमन है।मानवाधिकार शिकायतों के आंकड़ों में फर्जीवाड़ा बीआरएसआर में वेदांता ने यह दर्शाया कि जबरन/अनैच्छिक श्रम 0 शिकायत जबकि सच्चाई यह है कि 171 शिकायतें दर्ज की गई। सभी को सिस्टम द्वारा एकनॉलेजम और यूनीक रेफरेंस नंबर मिले। बाद में पोर्टल बंद कर साक्ष्य दबाने का प्रयास किया गया। यह मानवाधिकार उल्लंघन, ई एस जी धोखाधड़ी और निवेशकों को गुमराह करने का गंभीर उदाहरण है। श्री अग्रवाल ने सेबी से मांग की है कि वेदांता की बीआरएसआर वित्तीय वर्ष 2024-25 की फॉरेंसिक जांच कराई जाए। कंपनी को संशोधित और सत्य बीआरएसआर पुनः दाखिल करने का आदेश दिया जाए।
सेबी एक्ट एवं एल ओ डी आर रेगुलेशंस के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाए। कंपनी के कंप्लायंस ऑफिसर, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और एश्योरेंस प्रोवाइडर की भूमिका की जांच हो। निवेशकों और बाजार की निष्पक्षता की रक्षा के लिए कठोर आदेश पारित किए जाएं। श्री अग्रवाल ने कहा कि यह मामला केवल एक कंपनी की रिपोर्टिंग का नहीं, बल्कि निवेशक संरक्षण, मानवाधिकार, ई एस जी की विश्वसनीयता और भारतीय पूंजी बाजार की साख से जुड़ा हुआ है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सेबी इस गंभीर धोखाधड़ी पर कितनी सख्त और उदाहरणात्मक कार्रवाई करता है।

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