श्रद्धालुओं ने शीतल पकवानों का भोग लगाकर किया ठंडा भोजन, शीतला अष्टमी पर की गई विधि विधान से पूजा अर्चना

Must Read

कोरबा। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी मनाया जाता है। यह पर्व 11 मार्च को यानी बुधवार को मनाया गया। परंपरा के अनुसार इसके एक दिन पहले यानी सप्तमी तिथि 10 मार्च को रांधा पुआ यानी पकवान बनाने की रस्में निभाई गई। घरों में विभिन्न पकवान तैयार किए गए। इससे पहले अग्नि की और रोटी की पूजा की गई। बुधवार को शीतल पकवानों का भोग शीतला माता को लगाया गया। परिवार के सदस्यों ने भी ठंडा भोजन प्रसाद के रूप में ग्रहण किया।शीतलाष्टमी केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि मौसम परिवर्तन के दौरान शरीर को संतुलित रखने वाली भारतीय जीवनशैली का भी पर्व है। शीतला माता की पूजा सप्तमी और अष्टमी दोनों तिथियों पर अलग-अलग स्थानों पर की गई। पंचांग देखकर चैत्र कृष्ण सप्तमी का पर्व मंगलवार को मनाया गया। उदया तिथि के अनुसार शीतला अष्टमी का व्रत बुधवार को रखा गया। अष्टमी तिथि 10 मार्च की रात 1:54 बजे शुरू होकर 12 मार्च की सुबह 4:19 बजे तक रहेगी। 11 मार्च को सुबह 6:03 बजे से शाम 5:56 बजे तक माता की पूजा का शुभ समय रहा। इस अवसर पर घरों में रबड़ी, पुआ, पूरी, कांजी बड़ा, मोहनथाल, सकरपारा, नमकीन, गूंजी और पेठा हलुआ सहित कई प्रकार के पकवान बनाए गए। इनका भोग माता को लगाकर प्रसाद ग्रहण किया गया। पंडितों ने बताया कि स्कंद पुराण में शीतला माता का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि देवी की आराधना करने से चेचक, खसरा और अन्य संक्रामक बीमारियों से रक्षा होती है। इसी कारण इस दिन ठंडे या एक दिन पहले बने भोजन का भोग लगाने की परंपरा की शुरुआत हुई। अन्य राज्यों में इस पर्व को बसौड़ा या बास्योड़ा नाम से मनाया जाता है। महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और बच्चों के लिए व्रत रखती हैं। आयुर्वेदाचार्य ने बताया कि होली के बाद ऋतु परिवर्तन होता है। मौसम ठंड से गर्मी की ओर बढ़ने लगता है। इस समय शरीर में पित्त और कफ के दोष बढ़ सकते हैं। ऐसे में एक दिन हल्का, शीतल भोजन करने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है। प्राचीन समय में चेचक और अन्य त्वचा रोगों को शीतला माता से जोड़ा जाता था। इस दिन रसोई को विश्राम देने की परंपरा है।

Loading

Latest News

अवैध व फर्जी बिजली कनेक्शन का पता लगाने चलेगा अभियान, 2 लाख बिजली उपभोक्ताओं की होगी ई-केवाईसी

कोरबा। जिले में अवैध व फर्जी बिजली कनेक्शन का पता लगाने 2 लाख उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी की जाएगी। मीटर...

More Articles Like This