संविदा स्वास्थ्य कर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव ने जारी किया पत्र
कोरबा। संविलियन सहित अन्य मांगों को लेकर हड़ताल पर बैठे एनएचएम कर्मियों का आंदोलन जारी है। इस बीच प्रदेश सरकार ने हड़ताली कर्मचारियों पर पर सख्ती बरतना शुरू किया है। कार्य से अनुपस्थित डॉक्टर सहित अन्य सभी स्टॉफ को कारण बताओ नोटिस जारी करने के लिए जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को कहा है। इसकी पुष्टि स्वास्थ्य अधिकारी ने की है। कोरबा सहित प्रदेश के सभी जिलों में राष्ट्रीय स्वास्थ मिशन के तहत काम करने वाले डॉक्टर, स्टॉफ नर्स, एएनएम, लैब टैक्निशियन और क्लर्क सहित सभी कर्मचारी हड़ताल पर हैं। उनकी हड़ताल 18 अगस्त से चल रही है। अपनी मांगों को लेकर कर्मचारी कोरबा के घंटाघर चौक पर टेंट तानकर प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार तक अपनी मांगों को पहुंचा रहे हैं। लेकिन अभी तक उनकी सभी मांगों पर सरकार सहमत नहीं हो रही है। इसे लेकर गतिरोध बना हुआ है। इस बीच प्रदेश सरकार ने आंदोलनकारियों पर सख्ती बरतना शुरू किया है। इसी कड़ी में शुक्रवार को लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया ने सभी जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को एक पत्र जारी किया है। पत्र की भाषा कठोर है। इसमें हड़ताल पर बैठे एनएचएम कर्मचारियों पर कार्रवाई के लिए कहा गया है। स्वास्थ्य सचिव ने हड़ताल को अनुचित करार देते हुए 18 अगस्त से हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों के संबंध में सूचना मांगी है। जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से कहा गया है कि वे सभी हड़ताली कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करें। साथ ही कार्यालय में अनुपस्थित होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए कहा है। सचिव ने कहा कि जरुरत पड़ने पर हड़ताली कर्मचारियों को सेवा से भी पृथक किया जा सकता है। कार्य नहीं तो नहीं वेतन के सिद्धांत को लागू करने की बात कही है। साथ ही अनुपस्थित अवधि में वेतन की गणना नहीं करने कहा है। कोरबा जिले में एनएचएम के तहत 700 से अधिक कर्मचारी नियुक्ति हैं। इसमें डॉक्टर से लेकर नर्स, लैब टैक्निशियन से लेकर क्लर्क तक शामिल हैं। इनके हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ा है। कई केन्द्रों में ताले लटके हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले मरीज परेशान हैं। हालांकि शहरी क्षेत्र में हड़ताल का ज्यादा असर नहीं हुआ है। यहां स्वास्थ्य विभाग वैकल्पिक व्यवस्था से काम चला रहा है।
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